रामपुर तिराहाकांड में फर्जी हथियार बरामदगी मामले में बचाव पक्ष के गवाह से जिरह के लिए सुनवाई टल गई। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर (मंगलवार) की तारीख नियत की है।
एक अक्टूबर 1994 की रात पृथक राज्य की मांग के लिए दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने रामपुर तिराहे पर फायरिंग कर दी थी। पुलिस फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। जबकि महिलाओं से छेड़छाड़ और दुष्कर्म के आरोप भी लगे थे। पुलिस ने आंदोलनकारियों की बस और अन्य वाहनों की तलाशी कर भारी मात्रा में हथियार बरामद करने का दावा करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीबीआई ने मामले की विवेचना कर हथियार बरामदगी को फर्जी बताते हुए झिंझाना के तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजकिशोर सहित तीन पुलिस कर्मियों पर रिेपोर्ट दर्ज की थी। आंदोलनकारियों पर फर्जी हथियार बरामदगी के मामले में बचाव पक्ष की ओर से सफाई में गवाह प्रदीप शर्मा को पेश किया गया था। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि प्रदीप शर्मा ने अपने बयान में बताया था कि घटना के दिन पुलिस ने उसके सामने अवैध हथियार बस से बरामद किए थे। इस मामले में सोमवार को गवाह से एमपीएमएलए कोर्ट में जिरह होनी थी, लेकिन जिरह नहीं हो पायी। कोर्ट ने इस मामले में जिरह के लिए 31 अक्टूबर (मंगलवार) की तारीख नियत की है।