उत्तर प्रदेश में परिवहन सेवा को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी सुरू कर दी गई है. इसके तहत सरकार प्रदेश के 28 हजार गांवों को बस सेवा से जोड़ा जाएगा. इसके लिए 1540 बस रूट निर्धारित किए गए हैं. इस योजना के लिए उन बसों को इस्तेमाल किया जाएगा जो महाकुंभ के लिए मंगाई गईं थी. ऐसी तीन हजार बसें हैं जिन्हें नए मार्गों पर संचालित करने की तैयारी की गई है. 

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान यूपी विधानसभा में गांवों को बस सेवा से जोड़ने की योजना की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि जो 3 हजार बसें महाकुंभ में लगाई गई थीं. उन बसों को नए रूटों पर संचालित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके बाद जो गांव बच जाएंगे उन्हें भी मुख्यमंत्री ग्राम जोड़ो योजना के अंतर्गत बस सेवा से जोड़ा जाएगा. 

महाकुंभ की बसों को ग्राम बस सेवा में जोड़ा जाएगा
परिवहन मंत्री ने सपा सदस्य पंकज मलिक और अखिलेश के सवालों का जवाब दे सकते हुए कहा कि सरकार ने अब तक 6638 नई बसें खरीदी है. इनमें से तीन हजार बसे महाकुंभ में लगाई गईं थीं. उन्होंने कहा कि जो बसें खाली हुई हैं. उन्हें अब नए मार्गों पर संचालित किया जाएगा. दयाशंकर सिंह ने कहा कि परिवहन विभाग में दस साल का समय पूरा करने करने या 11 लाख किमी की दूरी तय करने के बाद बस को बड़े बेड़े से  हटा दिया जाता है. कुछ बसों को वर्कशॉप में ठीक कर 15 साल भी चलाया जाता है. 

दयाशंकर सिंह ने विधानसभा में दावा किया है कि इस समय यूपी में एक भी खटारा या डग्गामार बस नहीं चल रही है. जो निजी बसें चलती भी दिखाई देती हैं तो वो नेशनल परमिट लेकर चल रही है. हालांकि इन्हें रास्ते में बसें रोककर सवारियां भरने की इजाज़त नहीं होती. अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उस पर एक्शन लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार गांवों को बस सेवा से जोड़ने पर काम कर रही है. 

जो गांव बस मार्ग से छूट गए हैं उन गांवों को मुख्यमंत्री ग्राम जोड़ो योजना के तहत बस मार्ग से जोड़ा जाएगा. इसके लिए छोटी बसें खरीदी जाएंगी. इनमें डीज़ल और इलेक्ट्रिक बसों की नई खेप भी आने जा रही है. 

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