मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) न सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश, बल्कि बिहार और नेपाल के भी एक बड़े हिस्से को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 12 करोड़ की आबादी अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिये गोरखपुर स्थित एम्स पर निर्भर है।

आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मौजूदगी में गोरखपुर स्थित एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा, “जब मैं गोरखपुर के एम्स की बात करता हूं तो यह पूर्वी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर बिहार और नेपाल के भी एक बड़े भूभाग को भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाता है।

उन्होंने कहा, “पटना और लखनऊ के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय को छोड़ दें तो एम्स के अलावा कोई भी इस प्रकार का कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। पांच करोड़ की आबादी प्रत्यक्ष रूप से और सात करोड़ की आबादी अप्रत्यक्ष रूप से गोरखपुर स्थित एम्स पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “एम्स 2014 से पहले गोरखपुर के लिये एक सपना था। आज जब एम्स का पहला बैच यहां से निकल रहा है तो हम सबके चेहरे पर चमक, उत्साह और उमंग है।”

आदित्यनाथ ने पूर्वांचल में हर वर्ष फैलने वाली ‘इंसेफेलाइटिस’ बीमारी का जिक्र करते हुए कहा, “आठ वर्ष पहले इंसेफेलाइटिस की बीमारी हजारों बच्चों की मौत का कारण बनती थी। 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश के अंदर 50 हजार से अधिक बच्चों की मौत जिस बीमारी से हुई थी उसका उपचार 2014 के बाद गंभीरता से शुरू हुआ। खुशी की बात यह है कि ‘इंसेफेलाइटिस’ का आज हम पूरी तरह उन्मूलन कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2016 में गोरखपुर स्थित एम्स की आधारशिला रखी थी और 2021 में इसका लोकार्पण किया गया। आदित्यनाथ ने कहा, “पहले गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में एक ही चिकित्सा संस्थान हुआ करता था लेकिन आज पूर्वांचल के लगभग हर जिले में एक-एक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल है। मेडिकल कॉलेजों की एक बाढ़ सी आ गई है लेकिन हमारे सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन चुनौतियों से निपटने के लिए अपने आप को तैयार करना होगा।”

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