एटा के जलेसर में सिपाही अंकित की मौत के बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में  मुजफ्फरनगर के भौराखुर्द गांव में अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने पुलिस की आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि अंकित से लगातार बात चल रही थी, किसी तरह की परेशानी में वह नहीं था।

मृतक अंकित  के भाई आशीष ने बताया दो दिन पहले ही मोबाइल पर बात हुई थी। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था परीक्षाओं की तैयारी के लिए लैपटॉप लेकर आया था। घर में सभी से रोज फोन पर बात करता था, किसी प्रकार के तनाव दबाव की कोई बात नहीं थी। उसके आत्महत्या करने की बात हजम नहीं हो रही है। फंदे पर लटक कर आत्महत्या करने का कोई लक्षण भी शरीर पर मौजूद नहीं था।

पुलिस अधिकारी दरवाजा तोड़कर सब बाहर निकालने की बात बता रहे हैं, जबकि दरवाजे पर कुंडी ताला तोड़ने का कोई निशान भी मौजूद नहीं है। आरोप लगाया कि अधिकारी सही तथ्य नहीं बता रहे हैं घटना संदिग्ध है। गांव प्रधान निश्चल बालियान, विपिन बालियान ,पूर्व प्रधान चंद्रवीर सिंह, संजीव प्रधान बताते हैं अंकित बेहद मिलनसार था। एक माह पहले ही छुट्टी पर घर आया था।

रविवार  देर शाम जैसे ही सिपाही अंकित का पार्थिव शरीर गांव में लाया गया तो गम का माहौल बन गया। अंकित के पिता  बहन, भाई ,मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंकित की मां रेखा बेटे का शव देखकर बेहोश हो गई। पड़ोसी महिलाओं ने उसे बामुश्किल संभाला। अंतिम यात्रा में रिश्तेदारों के साथ ही गांव के सैकड़ो लोग शामिल हुए। गांव के शमशान घाट पर गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
एटा जिले के जलेसर कोतवाली मे तैनात भौरा खुर्द निवासी सिपाही अंकित कुमार  ने शनिवार को अपने सरकारी आवास में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। साथी सिपाही ने कमरे में जाकर देखा तो घटना की जानकारी हुई उसने तुरंत ही थाना प्रभारी को बताया । थाना प्रभारी एवं पुलिसकर्मियों ने कमरा खोल कर  देखा तो  पंखे के सहारे अंकित  लटका हुआ था। पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दी थी।

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