उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बबेरू तहसील क्षेत्र से जमीन हड़पने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक महिला पर आरोप लगा है कि उसने 32 बीघा बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने के लिए पहले धर्म परिवर्तन किया, फिर खुद को एक संत की शिष्या बताया। संत के निधन के बाद फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनकी पत्नी बनकर संपत्ति पर दावा ठोंक दिया। पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संत की 32 बीघा जमीन को लेकर सामने आए इस मामले ने इलाके में सनसनी फैला दी है। इलाके में मामले की चर्चा हो रही है।
कब्जे के लिए की साजिश
मामला बबेरु तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अटघार स्थित दाता कुटी आश्रम से जुड़ा है। यहां के संत सत्य निरुपम उर्फ लोटन पुत्र ननकौना के नाम तहसील बबेरु के मौजा मुड़वारा में करीब 32 बीघा कृषि भूमि दर्ज है। संत सत्य निरुपम आजीवन अविवाहित रहे और सन्यासी जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनका निधन 12 अप्रैल 2025 को दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था।
संत के निधन के बाद उनकी जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मृतक संत के गोद लिए पुत्र निर्मल शाह ने पुलिस क्षेत्राधिकारी बबेरु को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि एक महिला ने धोखाधड़ी और कूटरचना के जरिए आश्रम और संत की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया है।
धर्म, पहचान छिपाने का आरोप
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि संबंधित महिला मूल रूप से मुस्लिम थी। उसने अपनी पहचान और धर्म छिपाकर पहले स्वयं को संत की शिष्या बताया। वह कथित रूप से गुरुदक्षिणा देकर आश्रम में रहने लगी। इसके बाद संत का विश्वास जीत लिया। संत के जीवित रहते उसने स्वयं को शिष्या के रूप में प्रस्तुत किया। संत के निधन के बाद उसने खुद को उनकी पत्नी बताना शुरू कर दिया।
फर्जी आधार कार्ड बनवाने का दावा
निर्मल शाह के अनुसार, महिला ने जमीन हथियाने के उद्देश्य से फर्जी आधार कार्ड बनवाया, जिसमें अपने पिता के नाम की जगह मृतक संत सत्य निरुपम को पति के रूप में दर्शाया गया। जबकि महिला के अन्य पहचान पत्रों में उसका नाम चरणोदक शाह पुत्री आपस शाह दर्ज है। इसी कथित फर्जी आधार कार्ड के आधार पर महिला ने नायब तहसीलदार न्यायालय बबेरु में चल रहे वरासत वाद में आपत्ति दाखिल कर दी, जिससे जमीन अपने नाम कराने का रास्ता साफ हो सके।
सबूत होने की कही बात
निर्मल शाह ने पुलिस को बताया कि उसके पास आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल समेत कई अहम दस्तावेज मौजूद हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि संत सत्य निरुपम अविवाहित थे। उनका महिला का उनसे कोई वैवाहिक संबंध नहीं था। उनका कहना है कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश के तहत जमीन हड़पने का है।
पुलिस क्षेत्राधिकारी बबेरु ने बताया कि मामले में महिला के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, कूटरचना और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सभी तथ्यों और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
