दिल्ली की एक मस्जिद में सपा प्रमुख अखिलेश के जाने से हंगामा मचा हुआ है। अब इसकी आंच लखनऊ तक पहुंच गई है। पोस्टर में लिखा है कि अखिलेश यादव मंदिर मस्जिद को सियासत से नहीं जोड़ते, हमारे लिए मजहब मोहब्बत की पहचान है। बता दें दिल्ली में एक मस्जिद में अखिलेश यादव के जाने के बाद बीजेपी ने सपा नेता अखिलेश यादव पर राजनीतिक बैठक करने का आरोप लगाया था। साथ ही उसी मस्जिद के बाहर 25 जुलाई को प्रदर्शन की भी चेतावनी दी थी।

#WATCH लखनऊ: समाजवादी पार्टी ने पार्टी के उत्तर प्रदेश मुख्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाया है जिसमें लिखा है, “अखिलेश यादव, जो नफरत का सौदा नहीं करते। मंदिर-मस्जिद को राजनीति से नहीं जोड़ते…” pic.twitter.com/HHXUXmO1Os

— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 24, 2025

क्या हुआ था विवाद?

22 जुलाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने कुछ सांसदों के साथ संसद के पास स्थित एक मस्जिद चले गए थे। उसके बाद दौरे की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसमें अखिलेश यादव सांसद और मस्जिद पदाधिकारियों के साथ कालीन पर बैठे नजर आ रहे हैं। ये फोटोज वायरल होने के बाद बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने मस्जिद को सपा का “कार्यालाय” बना दिया गया है। आरोप है कि मस्जिद में सपा की राजनीतिक बैठक की थी। हालांकि मामले में अखिलेश यादव ने भी जवाब दिया था कि बीजेपी लोगों को जोड़ना नहीं चाहती। आस्था जोड़ती है, लेकिन बीजेपी का हथियार धर्म है, वो बांटने में विश्वास करती है।

किसने लगवाए पोस्टर?

लखनऊ में सपा नेता मो. इंखलाक ने ये पोस्टर लगवाए। इसमें इंखलाक ने लिखवाया कि अखिलेश हैं वो, जो नफरत का सौद नहीं करते। मंदिर मस्जिद को सियासत से जोड़ा नहीं करते। बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा कि तुम्हारे लिए इबादत भी सियासी मैदान है, हमारे लिए मजहब मोहब्बत की पहचान है।

क्यों मस्जिद गए थे अखिलेश?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ रामपुर के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी और सांसद धर्मेंद्र यादव भी नजर आ रहे हैं। नदवी उस मस्जिद के इमाम भी हैं। कयास लगाए जा रहें हैं कि नदवी के आमंत्रण पर अखिलेश यादव मस्जिद गए थे। हालांकि अभी तक अखिलेश यादव ने मस्जिद जाने की कोई वजह स्पष्ट नहीं की है।

बीजेपी ने आज प्रदर्शन की दी थी चेतावनी

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्होंने सियासत से मस्जिद के माहौल को दूषित किया है। मस्जिद आस्था का केंद्र है, न कि किसी राजनीतिक गतिविधियों का। सपा नेता ने मर्यादाएं लांघी हैं और धार्मिक स्थल का दुरुपयोग किया है। इसपर जमाल ने चेतावनी दी थी कि 25 जुलाई को जुमा की नमाज के बाद बीजेपी उसी मस्जिद के बाहर प्रदर्शन करेगी।

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