बिहार सरकार ने भिक्षावृत्ति को समाप्त कर जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत राज्य के 10 जिलों में भीख मांगने वाले लोगों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना का उद्देश्य भिक्षुकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है।
10 जिलों में चल रही योजना, 19 पुनर्वास केंद्र संचालित
फिलहाल यह योजना पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण जिलों में लागू की गई है। समाज कल्याण विभाग की ओर से इन जिलों में 19 पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां भिक्षुकों को अस्थायी रूप से रखा जाता है।
मुफ्त मिल रही हैं ये सुविधाएं
इन पुनर्वास केंद्रों में भिक्षुकों को मुफ्त भोजन, कपड़े, इलाज, काउंसलिंग, योग और मनोरंजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि भिक्षुकों को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
कैसे मिलता है 10 हजार रुपये का लाभ?
पूर्णिया जिले के सेवा कुटीर की उत्प्रेरक अफसाना खातून के अनुसार, सबसे पहले सड़क किनारे भीख मांगने वाले लोगों को चिन्हित किया जाता है। स्वास्थ्य की स्थिति ठीक होने पर उन्हें भिक्षावृत्ति छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बाद उनका समूह (ग्रुप) बनाया जाता है और सामूहिक बचत की जानकारी दी जाती है। भिक्षावृत्ति छोड़ने के बाद सरकार की ओर से पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाते हैं। वर्तमान में पूर्णिया में 10 ग्रुप सफलतापूर्वक चल रहे हैं, जहां लोग चाय दुकान, अंडा दुकान और सब्जी बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
आवेदन प्रक्रिया शुरू
जो भिक्षुक स्वरोजगार से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदन जिले के सामाजिक सुरक्षा कोषांग में जमा किए जा रहे हैं। सत्यापन के बाद 10-10 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
14 और जिलों में खुलेगा नया पुनर्वास गृह
सरकार की योजना है कि आने वाले समय में 14 अन्य जिलों में नए पुनर्वास गृह खोले जाएं। इसके अलावा भोजपुर जिले में 2 हाफ-वे होम बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना का मकसद सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि भिक्षुकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन देना है।
