वैश्विक आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के बीच भारत के एलपीजी (LPG) आयात में मार्च महीने में तेज गिरावट दर्ज की गई है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले दो महीनों की तुलना में आयात में 40% से अधिक की कमी आई है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

7 साल बाद ईरान की भी वापसी

दिलचस्प बात यह है कि जिन देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, उन्होंने ही इस कमी को आंशिक रूप से पूरा करने में भूमिका निभाई। संयुक्त राज्य अमेरिका मार्च में भारत को एलपीजी सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरा, जबकि ईरान ने करीब सात साल बाद फिर से आपूर्ति शुरू की।

एलपीजी आयात घटकर लगभग 1.22 मिलियन टन

शिप-ट्रैकिंग फर्म Kpler के मुताबिक, मार्च में भारत का कुल एलपीजी आयात घटकर लगभग 1.22 मिलियन टन रह गया। यह जनवरी की तुलना में 46% और फरवरी (जो केवल 28 दिनों का महीना था) की तुलना में 40% कम है।

क्यों आई गिरावट?

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी के बाद आपूर्ति पर असर पड़ना शुरू हुआ, जब ईरान से जुड़ा सैन्य तनाव बढ़ा और Strait of Hormuz के रास्ते समुद्री यातायात प्रभावित हुआ।

प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश (मार्च 2026, हजार टन में)

संयुक्त राज्य अमेरिका – 420
संयुक्त अरब अमीरात – 226
कतर – 226
सऊदी अरब – 130
कुवैत – 90
ईरान – 43
अन्य – 8–4

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक आपूर्ति में यही अस्थिरता बनी रहती है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडारण पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है।

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