उत्तर प्रदेश में सांसद-विधायक अदालत ने विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) शैलेंद्र प्रताप सिंह सहित तीन आरोपियों को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के एक मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला शनिवार को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने सुनाया। यह मामला पिछले नौ साल से न्यायालय में विचाराधीन था। आरोपियों पर लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 11 मई 2019 को कोतवाली देहात के उतुरी गांव स्थित राजर्षि टंडन शिक्षण संस्थान में एमएलसी शैलेंद्र सिंह, अजय कुमार सिंह और जय प्रकाश सिंह के साथ मिलकर 50 से अधिक लोगों को भोजन करा रहे थे। आरोप था कि यह कृत्य लोकसभा निर्वाचन में मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया था और इसके लिए किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी। इस संबंध में कोतवाली देहात के उड़न दस्ता प्रभारी गजेंद्र कुमार सिंह ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद उतुरी निवासी एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह, उनके समर्थक जय प्रकाश और अजय सिंह के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मदन प्रताप सिंह ने बताया कि न्यायालय में पेश किए गए गवाहों के बयान विरोधाभासी पाए गए। इन्हीं साक्ष्य के अभाव के चलते अदालत ने सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।

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