बिहार में जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार का सियासी ‘खेला’ कर पाला बदलने से इंडिया गठबंधन की राह मुश्किल हो गई है। भाजपा ने सधी रणनीति से महाराष्ट्र की 48 और बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर विपक्ष का खेल बिगाड़ दिया है। इसके साथ अब गठबंधन में शामिल कांग्रेस, टीएमसी, आप, सपा जैसे दलों के अलग-थलग होकर लोकसभा चुनाव में जाने की आशंका खड़ी हो गई है। भाजपा भी यही चाहती है कि विपक्षी दल अलग-अलग चुनाव लड़े, जिससे उनके वोटों का बिखराव हो और भाजपा की राह आसान होती चली जाए।

कांग्रेस को बिहार व महाराष्ट्र में सहयोगियों के साथ सीटें बढ़ने की उम्मीद थी। अब बिहार मे फिर से जेडी (यू) और सहयोगी भाजपा के साथ हैं तो महाराष्ट्र में भी शिवसेना बड़ा धड़ा एनडीए में है। भाजपा ने पहले महाराष्ट्र और अब बिहार में गहरी सियासी चाल से कांग्रेस की उम्मीदों को पस्त कर दिया है।

नीतीश के आप, सपा, टीएमसी जैसे करीब 28 दलों को कांग्रेस के साथ मंच पर खड़ा करने से लगने लगा था कि इंडिया गठबंधन समान विचारधारा वाले मतदाताओं को एकजुट कर लोकसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकता है। पहले सीट शेयरिंग को लेकर गठबंधन में बयानबाजी चली लेकिन अब अब नीतीश के साथ छोडऩे से जनता के बीच विपक्ष को लेकर लगातार गलत संदेश जा रहा है।

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