भाषा पर बहस को फिर से हवा देते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार, 1 नवंबर को केंद्र सरकार पर हिंदी और संस्कृत के विकास के लिए उदार अनुदान देते हुए कन्नड़ की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। बेंगलुरु में कर्नाटक राज्योत्सव समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कन्नड़ के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि न देना भारत की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक के साथ अन्याय है। सिद्धारमैया ने कहा कि कन्नड़ को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता मिलने के बावजूद, इसे केंद्र द्वारा प्रवर्तित अन्य भाषाओं के समान वित्तीय या संस्थागत सहायता नहीं मिली है।

सिद्धारमैया ने कहा कि हिंदी और संस्कृत के विकास के लिए अनुदान दिए जा रहे हैं, लेकिन अन्य भारतीय भाषाओं के लिए नहीं। यह कन्नड़ के साथ अन्याय है।” उन्होंने राज्य से अपने भाषाई अधिकारों का दावा करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कन्नड़ लोगों से राज्य की भाषा, संस्कृति या पहचान को कमज़ोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध करने का भी आह्वान किया। उन्होंने राज्य की भाषाई विरासत की रक्षा के लिए एकजुटता की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा, “हमें उन सभी का विरोध करना होगा जो कन्नड़ विरोधी हैं।”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया है कि वे राज्य भर के कार्यालयों और आधिकारिक कार्यक्रमों में पानी की प्लास्टिक बोतलों के स्थान पर टिकाऊ विकल्पों का उपयोग करके पर्यावरण अनुकूल उपायों को सख्ती से अपनाएं। मुख्यमंत्री ने 28 अक्टूबर को जारी एक बयान में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। यह बयान शुक्रवार को मीडिया में जारी किया गया। 

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के खैरीघाट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम तेंदुए के हमले में सात वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। बच्ची को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर किया गया है। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खैरीघाट थाना क्षेत्र के बाजपुरवा गांव में शाम करीब पांच बजे आफरीन (7), पुत्री तसव्वर, अपने घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान झाड़ियों से निकले तेंदुए ने अचानक उस पर हमला कर दिया। बच्ची अस्पताल में भर्ती बच्ची की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और शोर मचाते हुए लाठी-डंडों के साथ तेंदुए की ओर बढ़े, जिसके बाद जंगली जानवर वहां से भाग गया। ग्रामीणों ने घायल बच्ची को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। सीएचसी शिवपुर के चिकित्सक डॉ. विकास सिंह ने बताया कि बच्ची गंभीर हालत में अस्पताल लाई गई थी। उसकी स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया गया, जहां उसका इलाज जारी है। गांव में दहशत का माहौल घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। वन क्षेत्राधिकारी पीयूष गुप्ता ने बताया कि टीम द्वारा क्षेत्र में जांच की जा रही है। रात का समय होने के कारण तेंदुए के स्पष्ट पगचिह्न नहीं मिल सके हैं, लेकिन इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है और आसपास के जंगल व झाड़ियों की निगरानी की जा रही है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने और नियमित गश्त कराने की मांग की है। वन विभाग ने लोगों से बच्चों को अकेले बाहर न भेजने और शाम के समय विशेष सतकर्ता बरतने की अपील की है।

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