जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह उत्सव मनाया जाता है। चूंकि, आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है तो इसलिए आज कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। आधी रात को भगवान का श्रृंगार और अभिषेक किया जाता है। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, झांकियां और रात्रि जागरण भी होते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

जन्माष्टमी पर व्रत कैसे रखें और कैसे खोलें?

  • वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के अनुसार—
  • इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का सुंदर श्रृंगार करें।
  • उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाएं।
  • भगवान के 108 नामों का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।
  • घर में रहकर भजन-कीर्तन करें।

भूलकर भी न करें ये चीजें 

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य होता है। तामसिक भोजन जैसे  मांसाहार, प्याज और लहसुन से परहेज़ करने है। रात मे श्रीकृष्ण जन्म के बाद, भगवान को भोग अर्पित करने के पश्चात ही व्रत तोड़ें। अगर भक्त इन चीजों का नहीं पालन करते तो माना जाता है भगवान अपने भक्तों से नाराज हो जाते हैं और व्रत भी अधूरा रह जाता है। 

मंदिर जाने का महत्व

प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, जन्माष्टमी के दिन कृष्ण मंदिर जाकर दर्शन करना बहुत लाभदायक होता है। मंदिर में विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान को चावल से बने मालपुए और मक्खन का भोग ज़रूर चढ़ाएं, क्योंकि यह श्रीकृष्ण के प्रिय भोग हैं। इस प्रकार, अगर जन्माष्टमी के दिन इन नियमों का पालन किया जाए तो माना जाता है कि भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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