इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत शुरू की गई कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया है। आरोप है कि गायत्री प्रजापति ने विभिन्न संपत्तियों की खरीद पर 2.98 करोड़ रुपए की अनुपातहीन राशि खर्च की थी।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीठ ने मंगलवार को एक विशेष अदालत में अपने खिलाफ कार्रवाई को चुनौती देने वाली प्रजापति की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। प्रजापति ने दलील दी थी कि मामले में सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई अपराध नहीं बनता है। उनकी याचिका को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएमएलए के तहत अपराध के प्रथम दृष्टया स्थापित सबूतों के बाद जांच करने के बाद शिकायत दर्ज की है और इसलिए इसमें कोई अवैधता नहीं है।
आपको बता दें कि पीएमएलए की विशेष अदालत द्वारा उनकी रिहाई की याचिका को खारिज करने और अदालत के उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को खारिज कर दिया गया। यह मानते हुए कि प्रजापति को विशेष अदालत के समक्ष मुकदमे का सामना करने की आवश्यकता है, पीठ ने कहा कि 2012 से 2017 के दौरान प्रजापति जो एक मंत्री थे ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और गैरकानूनी तरीके से कई करोड़ रुपए नकद प्राप्त किए, जो बैंक खातों में जमा किए गए थे। उनके परिवार के सदस्यों, उनके कर्मचारियों और कंपनियों की जिनमें उनके बेटे निदेशक थे। जांच से पता चला कि मंत्री बनने के बाद से आवेदक की संपत्ति में तेजी से वृद्धि हुई है।
