खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के मामले में अमेरिकी कोर्ट के भेजे समन पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।  भारतीय विदेश मंत्रालय ने उक्त समन पर आपत्ति जताते हुए इसे पूरी तरह से अनुचित करार दिया है। दरअसल, पन्नू ने एक सिविल केस में हत्या की साजिश का आरोप लगाते हुए भारतीय सरकार को सम्मन भेजा है।

इस मामले में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक बयान में कहा,” जैसा कि हमने पहले कहा है कि ये पूरी तरह से अनुचित और निराधार आरोप हैं। अब जब ये विशेष मामला दर्ज हो गया है, तो इस बारे में हमारे विचार नहीं बदलेंगे, मैं सिर्फ आपका ध्यान इस मामले के पीछे के व्यक्ति की ओर आकर्षित करना चाहता हूं, जिसका इतिहास सर्वविदित है। उनका कहना है कि वह इस फैक्ट को भी सामने रखना चाहेंगे कि ये व्यक्ति (पन्नू) जिस संगठन को लीड करता है, वह एक गैरकानूनी संगठन है, जिस पर UAPA के तहत प्रतिबंध लगाया गया है।

बता दें कि  इस केस में पन्नू ने भारतीय सरकार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, और अन्य अधिकारियों पर अमेरिका में उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। पन्नू, जो अमेरिकी-कनाडाई नागरिक हैं और भारत द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए हैं, का दावा है कि जून 2023 में उन पर हुए हत्या के प्रयास से वे बच निकले। इस मुकदमे में पूर्व रॉ प्रमुख सामंत गोयल, रॉ अधिकारी विक्रम यादव, और निखिल गुप्ता का भी नाम शामिल है। गुप्ता, जो एक भारतीय नागरिक हैं, वर्तमान में न्यूयॉर्क की जेल में हत्या के लिए किराए पर हत्यारा रखने के आरोप में बंद हैं।

पन्नू ने इस हमले और मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजे की मांग की है। उनका आरोप है कि रॉ के द्वारा योजना बनाई गई थी, लेकिन इसे अमेरिकी गुप्त एजेंटों द्वारा विफल कर दिया गया, जो हत्यारों के रूप में काम कर रहे थे। पन्नू का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस साजिश की जानकारी थी, लेकिन उन्हें मुकदमे में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि उनके पास कूटनीतिक छूट है।

 

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