उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का मोहम्मदगंज गांव इन दिनों सांप्रदायिक तनाव की चपेट में है। विवाद की जड़ एक घर में पढ़ी गई सामूहिक नमाज है, जिसने दशकों पुराने उस सामाजिक समझौते को खतरे में डाल दिया है जिसके तहत इस गांव में कभी कोई धार्मिक स्थल नहीं बनाया गया था। अब स्थिति यह है कि कई हिंदू परिवारों ने घर के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए हैं।

क्या है विवाद की असली वजह?
विवाद की शुरुआत 17 जनवरी को हुई, जब हसीन मियां के घर में सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। हिंदू पक्ष ने इसे ‘नई परंपरा’ बताते हुए विरोध किया। ग्रामीणों के अनुसार, सालों पहले यह तय हुआ था कि गांव की शांति के लिए यहां न मंदिर बनेगा, न मस्जिद। सभी अपने घरों के अंदर इबादत करेंगे। हिंदू पक्ष का दावा है कि हसीन मियां के घर को जानबूझकर अस्थाई मस्जिद का रूप दिया जा रहा है, जो कानूनन गलत है।

हाईकोर्ट में मामला, फिर भी दोबारा नमाज
पुलिस ने शुरुआत में 12 लोगों पर शांति भंग की कार्रवाई की थी, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट चला गया। कानूनी प्रक्रिया के बीच ही 14 फरवरी को उसी घर में फिर से सामूहिक नमाज हुई और उसका वीडियो वायरल कर दिया गया। इससे हिंदू पक्ष भड़क उठा और बजरंग दल व राष्ट्रीय हिंदू दल जैसे संगठन भी मैदान में उतर आए।

‘हम घर बेचकर चले जाएंगे’ – ग्रामीणों का दर्द
रूपवती समेत कई हिंदू ग्रामीणों का आरोप है कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है और आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। उनका कहना है कि अगर यह ‘नई परंपरा’ नहीं रुकी, तो वे गांव से पलायन कर जाएंगे। दूसरी ओर, ग्राम प्रधान आरिफ और मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे 20-25 साल से घरों में नमाज पढ़ रहे हैं और उन्होंने हमेशा कांवड़ यात्रा में सहयोग किया है। उनका आरोप है कि ‘बाहरी लोग’ गांव का माहौल बिगाड़ रहे हैं।

प्रशासन की स्थिति: शांति का दावा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने पलायन की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों पक्षों से बातचीत की गई है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी और कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।

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