प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र को महिला सशक्तिकरण के इतिहास में एक “ऐतिहासिक कदम” करार दिया है। बुधवार को सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार महिलाओं को  राजनीति के मुख्य मंच पर लाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं का सम्मान और उनकी भागीदारी ही एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।

राष्ट्र की गरिमा और नारी शक्ति: PM का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक प्रेरक पोस्ट के जरिए देश को संबोधित किया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक जड़ों का हवाला देते हुए संस्कृत श्लोक के माध्यम से इस पहल के महत्व को समझाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा “आज से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में, हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है, और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संसद के स्पेशल सेशन को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक “ऐतिहासिक कदम” बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि महिलाओं की गरिमा देश की गरिमा को दिखाती है। X पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस रास्ते पर पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ रही है, उन्होंने इस पहल के महत्व पर ज़ोर देते हुए एक संस्कृत श्लोक का ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा, “आज से, संसद के स्पेशल सेशन में, हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

 

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही देश का सम्मान है, और इसी भावना के साथ, हम इस दिशा में पक्के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं।” इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि PM मोदी 16 अप्रैल को महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिल पर लोकसभा को संबोधित करने वाले हैं, और उम्मीद है कि वह इस कानून के लिए एक डिटेल्ड रोडमैप बताएंगे। केंद्र ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिन का स्पेशल सेशन बुलाया है। इसमें ऐसे बदलाव लाए जाएंगे जिनसे 2029 से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 परसेंट रिज़र्वेशन हो जाएगा। यह 2027 के बाद की जनगणना के बाद डिलिमिटेशन से जुड़ी मौजूदा टाइमलाइन की जगह लेगा।

 

क्यों खास है यह संशोधन?

अब तक महिला आरक्षण बिल के लागू होने को लेकर संशय बना हुआ था क्योंकि इसे जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) से जोड़ा गया था। सरकार के इस नए कदम का उद्देश्य उस तकनीकी बाधा को दूर करना है, ताकि 2029 से देश की आधी आबादी को विधायी निकायों में उनका उचित स्थान मिल सके।

 

संसद का यह विशेष सत्र न केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, बल्कि यह देश की आधी आबादी को राजनीतिक नेतृत्व सौंपने का एक बड़ा वादा भी है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और प्रस्तावित संशोधनों के पारित होने के बाद, भारतीय राजनीति का स्वरूप हमेशा के लिए बदल सकता है।

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