हाल ही में अमेरिका ने एक बार फिर 116 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है। इन डिपोर्ट किए गए लोगों ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें पूरी तरह से जंजीरों और हथकड़ियों में जकड़ा गया था, जो उनके लिए बेहद परेशान करने वाली और अमानवीय स्थिति थी। ये घटनाएं अमेरिका द्वारा भारतीय नागरिकों के साथ की जा रही अमानवीय व्यवहार की ओर इशारा करती हैं। हालांकि अमेरिका की ओर से कहा गया कि यह सुरक्षा कारणों से किया गया था, लेकिन डिपोर्ट हुए भारतीयों का अनुभव बिल्कुल अलग था। इन भारतीय नागरिकों ने बताया कि उन्हें हवाई यात्रा के दौरान हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीरों से जकड़ा गया था। यह स्थिति उनके लिए बेहद अपमानजनक और दर्दनाक थी। कुछ डिपोर्ट हुए लोग इस पर असंतुष्ट थे, जबकि कुछ ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।

पिछली बार भी ऐसी ही घटनाएं सामने आई थीं जब 104 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था। इस बार भी वही अमानवीय स्थिति सामने आई, जिस पर भारत सरकार को कड़ी प्रतिक्रिया देनी पड़ी थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तब संसद में यह स्पष्ट किया था कि वह अमेरिका से इस मामले में बात करेंगे ताकि भारतीयों के साथ ऐसा व्यवहार न किया जाए।

एस जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में कहा था, “हम डिपोर्टेशन के मामलों पर लगातार अमेरिका सरकार से संपर्क में हैं। 2012 से लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत डिपोर्ट किए जा रहे लोगों को फ्लाइट में हथकड़ी लगाकर और पैरों में जंजीर डालकर ले जाया जाता है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारतीय नागरिकों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार फिर से न हो।”

अमेरिका द्वारा डिपोर्ट किए गए 116 भारतीय नागरिकों में से अधिकतर पंजाब, हरियाणा और गुजरात से थे। पंजाब से 65, हरियाणा से 33, और गुजरात से 8 लोग थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी कुछ लोग थे। दिलजीत सिंह नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि वे भी इस डिपोर्टेशन बैच का हिस्सा थे। वह पंजाब के होशियारपुर जिले के कुराला कलां गांव से हैं।

नरक जैसा अनुभव बताया

मनदीप सिंह, जो कपूरथला जिले के भोलाथ इलाके के रहने वाले हैं, ने इस पूरी यात्रा को बेहद कठिन बताया। उन्होंने बताया कि उन्हें भी हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीर डाली गई थी और लगभग 66 घंटे का यह समय उनके लिए बहुत कठिन था। उन्होंने बताया, “हमारे साथ जो हुआ, वह निश्चित रूप से सुरक्षा कारणों से था। कोई नहीं जानता कि यात्रा के दौरान किसी की मानसिक स्थिति क्या हो सकती है और हताशा में कुछ भी हो सकता है।”

भारत वापसी के बाद का अनुभव

इन भारतीय नागरिकों ने कहा कि एयरपोर्ट पर उनके इमिग्रेशन और बैकग्राउंड की जांच की गई और उसके बाद उन्हें घर जाने की अनुमति दी गई। हालांकि, इन डिपोर्ट किए गए लोगों की मानसिक स्थिति बहुत खराब थी, क्योंकि उन्हें खाना नहीं दिया गया था और वे 15 दिन से नहाए तक नहीं थे। इसके अलावा, उन्होंने कभी भी अपने दांतों को भी नहीं ब्रश किया था। दिलजीत सिंह के अनुसार, उन्हें डंकी रूट से अमेरिका ले जाया गया था। उनका कहना है कि उन्हें ट्रैवल एजेंसी द्वारा धोखा दिया गया था, जिन्होंने कानूनी रास्ते का वादा किया था लेकिन अवैध रास्ते का इस्तेमाल किया। दिलजीत के गांव के ही एक व्यक्ति ने उन्हें उस ट्रैवेल एजेंट से मिलवाया था।

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