मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने शहर में गोरखनाथ विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ कार्यशाला में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह देश विभाजित था, इसलिए गुलाम हुआ। हमें फिर से विभाजित नहीं होना है। विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए पंच प्रण लेना होगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पंच प्रण हैं- गुलामी की मानसिकता को खत्म करना होगा। अपने अंदर की हीन भावना को खत्म करना होगा। विरासत का सम्मान करना होगा। अपनी सेना के जवानों के प्रति सम्मान का भाव रखना होगा। हर नागरिक को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भलीभांति निभाना होगा।

भारत को ऐसे ही थोड़ी सोने की चिड़िया कहते थे
उन्होंने कहा- भारत को ऐसे ही थोड़ी सोने की चिड़िया कहते थे। ऐसे ही विदेशी आक्रांता यहां नहीं आए थे। हमारे पास सबकुछ थे। आज से 300 वर्ष पहले के भारत की तुलना करते हैं तो 17वीं सदी में कृषि और उद्योग के क्षेत्र में भारत दुनिया में नंबर एक पर था।

सीएम ने इस कार्यक्रम को लगभग ढेड़ घंटे तक संबोधित किया और आगे कहा कि वर्तमान में धीरे-धीरे हमारा सबकुछ केवल खेती बाड़ी पर निर्भर हो गया। डिमांड कम है, सप्लाई ज्यादा करेंगे तो दाम भी नहीं मिलेगा। यही होता गया। इससे देश धीरे-धीरे भुखमरी की कगार पर आ गया। हजारों लोग मरे। कोई पूछने वाला नहीं था।

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