उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर त्योहार और परंपरा को लेकर गरमा गई है। दीपोत्सव के खर्चों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी के जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “गद्दी विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि नहीं।”

दीपोत्सव से किसानों, कुम्हारों को मिला सम्मान
सीएम योगी ने गोरखपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दीपोत्सव कोई फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा उत्सव है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी किसानों और कुम्हारों का अपमान कर रही है, जो दीप बनाने और उसमें इस्तेमाल होने वाला तेल तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि  “तेल किसान से आ रहा है, दीप प्रजापति समाज बना रहा है। हमने कुम्हारों को मुफ्त मिट्टी, इलेक्ट्रिक और सोलर चाक उपलब्ध कराए हैं। बाजार में उछाल इसलिए है क्योंकि अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के हाथ में पैसा पहुंच रहा है।”

दीप-मोमबत्ती विवाद से शुरू हुआ मामला
इस सियासी बयानबाज़ी की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश यादव ने अयोध्या में हो रहे दीपोत्सव कार्यक्रम के खर्च पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था, “बार-बार दीयों और मोमबत्तियों पर खर्च क्यों? हमें क्रिसमस से सीखना चाहिए।” इस पर सीएम योगी ने कहा कि “जहां कभी गोलियां चली थीं, वहां अब दीए जल रहे हैं।” योगी ने कहा कि अखिलेश यादव को रामजन्मभूमि, रामभक्तों और अब दीपावली से भी समस्या है। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों का बचपना जीवनभर नहीं जाता। आज वही लोग रामद्रोही, कृष्णद्रोही और सनातन विरोधी बन गए हैं।”

सियासत या संस्कृति?
मुख्यमंत्री ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक कम और सांस्कृतिक अधिक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि इससे स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों को रोज़गार भी मिल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “डबल इंजन की सरकार” ने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को पुनः स्थापित करने का काम किया है, जिससे जनता को गर्व का अनुभव हो।

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