दीपावली के शुभ अवसर पर काशी के विश्वविख्यात दशाश्वमेध घाट पर एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था और भक्ति की अलौकिक छटा देखने को मिली। लगभग 100 दिनों के लंबे अंतराल के बाद गंगा आरती का आयोजन एक बार फिर अपने मूल स्थल पर शुरू हो गया, जिससे श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट नजर आया।

गंगा के जलस्तर में आई कमी के बाद दशाश्वमेध घाट आरती आयोजन के लिए उपयुक्त हो गया। इस अवसर पर घाट को दीपों से भव्य रूप से सजाया गया था, और हर दिशा में शंख, घड़ियाल और डमरू की मधुर ध्वनियां गूंज रही थीं। श्रद्धालु घंटों पहले से घाट पर एकत्र होने लगे थे।

आरती के दौरान गंगा मैया के जयकारों से गूंजता घाट एक बार फिर उस दिव्यता से भर उठा जिसके लिए यह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। आरती में सम्मिलित हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा मैया से मोक्ष और कल्याण की कामना की। गौरतलब है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण यह आरती पिछले तीन महीनों से वैकल्पिक स्थानों पर की जा रही थी, जिसे अब पुनः घाट पर ही आयोजित किया जा रहा है।

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