दतिया में उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा के सबसे मजबूत दावेदार नरोत्तम मिश्रा से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। इस मुलाकात को आगामी दतिया उपचुनाव और राज्यसभा समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा पूर्व गृहमंत्री को राज्यसभा या दतिया में चुनाव लड़ा सकती है।

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दतिया उपचुनाव को लेकर एक तरफ असपा नेता दामोदर यादव ने मैदान संभाल लिया है, और चुनाव लड़ने का दावा किया है। दूसरी ओर भाजपा ने तैयारियां तेज कर दी और अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ऐसे में दतिया से नरोत्तम मिश्रा का नाम एक मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनकी पहचान और दतिया क्षेत्र में उनका प्रभाव भाजपा के लिए अहम साबित हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार दतिया में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि मजबूत और प्रभावशाली उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है। नरोत्तम मिश्रा का संगठन और क्षेत्र पर पकड़ उन्हें एक स्वाभाविक विकल्प बनाती है।

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वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। असपा अध्यक्ष दामोदर यादव ने भी दतिया सीट को लेकर अपना दावा ठोक दिया है। इससे साफ है कि मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प होने वाला है। हालांकि राजेंद्र भारती की विधायकी को लेकर कांग्रेस फिलहाल कोर्ट पर नजरें टिकाए हुए हैं। क्योंकि कांग्रेस ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है। कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि भारती की विधायकी बनी रहे और उपचुनाव न हो।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि भाजपा दतिया उपचुनाव में किसे उम्मीदवार बनाती है, लेकिन फिलहाल नरोत्तम मिश्रा की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक सरगर्मियों को तेज कर दिया है और प्रदेश की सियासत को एक नया मोड़ दे दिया है।

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