हर साल जनवरी में Thyroid Awareness Month मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को थायराइड ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं और उनके असर के बारे में जागरूक करना है। थायराइड ग्रंथि शरीर के हार्मोन संतुलन, मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, मूड और कई अहम अंगों के कामकाज को नियंत्रित करती है। इसलिए जब इसमें गड़बड़ी होती है, तो इसका असर पूरे शरीर की सेहत पर दिखाई देता है।

डाइटीशियन ने क्या बताया

एक डाइटीशियन ने सोशल मीडिया पर साझा जानकारी में Hypothyroidism से जूझ रहे लोगों के लिए एक खास एंटी-इंफ्लेमेटरी हर्बल चाय का जिक्र किया है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में दवाएं लेने के बावजूद त्वचा का रूखा रहना, बालों का झड़ना या पाचन से जुड़ी दिक्कतें बनी रहती हैं। ऐसे में थायराइड पैनल टेस्ट कराना जरूरी होता है, क्योंकि यह ऑटोइम्यून हाइपोथायराइडिज्म (हाशीमोटो) का संकेत हो सकता है, जिसमें शरीर में सूजन कम करना अहम माना जाता है।

66 दिनों तक अपनाने की सलाह

डाइटीशियन के अनुसार, इस हर्बल चाय को नियमित रूप से लगभग 66 दिनों तक पीने से शरीर में सूजन कम करने और थायराइड से जुड़े लक्षणों में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, इसे इलाज का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपाय माना जाना चाहिए।

चाय बनाने का आसान तरीका

एक बर्तन में एक कप पानी लें। इसमें धनिया के दाने, काला जीरा, हल्दी, चुटकीभर दालचीनी, आधा चम्मच सूखा अदरक पाउडर और एक छोटा चम्मच मोरिंगा पाउडर डालें। अंत में काली मिर्च डालकर पानी को अच्छे से उबालें। छानने के बाद थोड़ा काला नमक और नींबू का रस मिलाकर सेवन करें।

क्यों मानी जाती है फायदेमंद

इस चाय में इस्तेमाल की गई सामग्री शरीर की सूजन कम करने, पाचन सुधारने और हार्मोन संतुलन में मदद कर सकती हैं। धनिया और जीरा डाइजेशन को सपोर्ट करते हैं, हल्दी और काली मिर्च सूजन घटाने में सहायक मानी जाती हैं, दालचीनी ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करती है, जबकि मोरिंगा पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।

जरूरी सावधानी

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है, खासकर अगर आप पहले से थायराइड की दवाएं ले रहे हों।

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