कैंसर एक ऐसा नाम है, जिसे सुनते ही डर का एहसास होता है–खासकर तब जब बीमारी तीसरे स्टेज तक पहुंच जाए। लेकिन अब इस अंधेरे में रोशनी की एक नई किरण दिखाई दी है। वैज्ञानिकों ने mRNA तकनीक पर आधारित एक वैक्सीन तैयार की है, जो थर्ड स्टेज कैंसर के इलाज में न केवल असरदार साबित हो रही है, बल्कि मरीजों के जीवन को बढ़ाने की उम्मीद भी जगा रही है। कोविड-19 वैक्सीन में इस्तेमाल हुई इसी तकनीक ने अब कैंसर के इलाज में भी नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
 
mRNA तकनीक से बदलेगा कैंसर का इलाज
कोविड-19 के दौर में चर्चित हुई mRNA तकनीक अब कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही है। यह तकनीक शरीर की इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती है। पारंपरिक इलाज की तुलना में यह कहीं अधिक सटीक और टारगेटेड है।

ग्लियोब्लास्टोमा पर असरदार साबित
फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खासतौर पर ब्रेन कैंसर की एक घातक किस्म ग्लियोब्लास्टोमा के लिए mRNA वैक्सीन तैयार की है। शुरुआती परीक्षणों में इस वैक्सीन ने ट्यूमर के आकार को घटाने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने में सफलता दिखाई है।

रूस का भी दावा
रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी mRNA आधारित कैंसर वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है, जो खासतौर पर कैंसर रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

कैसे करती है काम?
जब यह वैक्सीन शरीर में डाली जाती है, तो यह टी-सेल्स और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय कर देती है। ये कोशिकाएं सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। खास बात यह है कि यह वैक्सीन थर्ड स्टेज कैंसर में बेहद असरदार साबित हो रही है, जहां कैंसर लिम्फ नोड्स या आसपास के टिश्यू तक फैल चुका होता है लेकिन शरीर में पूरी तरह नहीं फैला होता।

सर्जरी के बाद भी देती है सुरक्षा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह वैक्सीन सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में भी मदद करती है, जिससे बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना को कम किया जा सकता है। यह फायदेमंद खासतौर पर उन मरीजों के लिए हो सकती है जिन्हें पहले ही ऑपरेशन या कीमोथेरेपी दी जा चुकी हो।

आशाजनक नतीजे
प्रारंभिक रिसर्च में यह वैक्सीन थर्ड स्टेज कैंसर रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। इसके क्लिनिकल ट्रायल्स के सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं, और अगर आने वाले समय में यह बड़े स्तर पर सफल रहती है, तो यह कैंसर के इलाज में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है।

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