बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालते ही जमीनी स्तर पर असंतोष की लहर तेज हो गई है। इसी कड़ी में हाजीपुर के कद्दावर नेता और पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष सहदेव राय ने राजद को ‘अलविदा’ कहते हुए अपने लगभग एक हजार समर्थकों के साथ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का दामन थाम लिया है।
कुनबे में बड़ी सेंधमारी
बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह ने सहदेव राय और उनके समर्थकों को लोजपा (रामविलास) की विधिवत सदस्यता दिलाई। सहदेव राय की गिनती वैशाली के सफल कारोबारियों और सुलझे हुए राजनेताओं में होती है। उनके इस दलबदल से जिले में राजद का सांगठनिक ढांचा कमजोर होने की संभावना जताई जा रही है, जो आगामी चुनावों में पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकता है।
‘परिवारवाद और चापलूसी’ पर कड़ा प्रहार
पार्टी त्यागने के बाद सहदेव राय ने राजद नेतृत्व पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “राजद अब सिद्धांतों की पार्टी नहीं रही, बल्कि पूरी तरह परिवारवाद के दलदल में धंस चुकी है। वहां केवल चापलूसों की पूछ है, समर्पित कार्यकर्ताओं की नहीं। राजद में अब संघर्षशील नेताओं के लिए कोई जगह नहीं बची है।” सहदेव राय ने स्वर्गीय रामविलास पासवान को अपना शाश्वत मार्गदर्शक बताया और विश्वास जताया कि चिराग पासवान के नेतृत्व में बिहार का सर्वांगीण विकास संभव है।
लोजपा (रा) का बढ़ता कुनबा
इस अवसर पर मंत्री संजय सिंह ने कहा कि राजद के भीतर परिवारवाद से त्रस्त लोग अब बदलाव की ओर देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सहदेव राय जैसे जमीनी और समाजसेवी नेताओं के आने से लोजपा (रामविलास) वैशाली सहित पूरे प्रदेश में और अधिक मजबूत होगी।
