दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच छिड़ी नई व्यापारिक लड़ाई ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट को हिला कर रख दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयात होने वाले सभी “महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर” पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, और इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली।बिटकॉइन, इथेरियम और अन्य प्रमुख डिजिटल एसेट्स की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और बाजार में बेचैनी का माहौल बन गया है।

बाजार में हड़कंप: Bitcoin और Ethereum की बड़ी गिरावट
Bitcoin
: 8.4% गिरावट के साथ $111,841.14
Ethereum: 15.62% की भारी गिरावट के साथ $3,792.31
XRP: 22.85% की गिरावट, अब $2.33
Binance Coin: 6.6% गिरावट के साथ $1,094.09
Tether: 0.1% गिरकर $1.00

मार्केट कैप में भी भारी गिरावट:
Bitcoin का कुल मूल्यांकन 8.12% घटकर $2.23 ट्रिलियन
Ethereum का मार्केट कैप 13.81% गिरकर $456.97 बिलियन
XRP ने 16.31% मार्केट कैप लॉस झेला, अब $140.19 बिलियन
Binance Coin का मार्केट वैल्यू $152.27 बिलियन (12.91% गिरावट)
Tether मामूली गिरावट के साथ $178.97 बिलियन
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बिटकॉइन में ही लगभग $9.5 बिलियन का परिसमापन हुआ है, जो क्रिप्टो निवेशकों के लिए बड़ा झटका है।

झटका क्यों आया? चीन की ‘रेयर अर्थ मिनरल’ नीति बनी वजह
क्रिप्टो बाजार की इस गिरावट के पीछे दो मुख्य घटनाएं मानी जा रही हैं: चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर सीमा लगाने की घोषणा, जो सेमीकंडक्टर और हाई-टेक प्रोडक्ट्स के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिका की जवाबी कार्रवाई में ट्रंप द्वारा 100% टैरिफ की घोषणा और महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लगाने की धमकी। इससे न केवल टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित होंगे, बल्कि क्रिप्टो की वैल्यू भी गिरती जा रही है, क्योंकि निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

 ट्रंप का हमला: यह एक नैतिक अपमान है
ट्रंप ने Truth Social पर एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा: “चीन ने जो किया है, वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने दुनिया को धमकाते हुए निर्यात प्रतिबंध की नीति लागू की है। अमेरिका को इसका जवाब देना ही होगा।” उन्होंने आगे कहा कि 1 नवंबर 2025 से चीन के लगभग सभी उत्पादों और तकनीक पर 100% टैरिफ लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा, सभी रणनीतिक सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के निर्यात पर भी नियंत्रण लागू होगा। ट्रंप ने इस फैसले को अमेरिका के हित में “आवश्यक और अपरिहार्य” करार दिया।

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