उत्तर प्रदेश में जौनपुर जनपद के धर्मापुर ब्लॉक में स्थित कादीपुर नामक गांव अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है। जहां आजादी के बाद से अब तक किसी भी व्यक्ति पर कोई एफआईआर (फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज नहीं हुई है। करीब 3 हजार की आबादी वाला यह गांव आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द का असली उदाहरण बन चुका है।

पंचायत में सुलझते हैं आपसी विवाद
गांव के लोग बताते हैं कि यहां छोटे-मोटे झगड़े भी आपसी बातचीत और पंचायत के जरिए ही सुलझा लिए जाते हैं। इसलिए पुलिस या अदालत का सहारा लेना पड़ता ही नहीं। कादीपुर के रहने वाले संजय अस्थाना गर्व से कहते हैं कि उन्हें कभी पुलिस बुलानी पड़ी ही नहीं। यहां के बुजुर्ग और पंच मिलकर सभी विवादों को खत्म कर देते हैं और कोई गंभीर अपराध नहीं होता।

जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति से कभी भेदभाव नहीं
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कादीपुर में कभी किसी के साथ जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। त्योहार हों या शादी-ब्याह, सभी लोग एक-दूसरे का साथ देते हैं। यही एकता और भाईचारा पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है और युवा भी इसे कायम रखने के लिए प्रेरित हैं।

पुलिस और प्रशासन भी करता है सराहना
स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी कादीपुर गांव की खूब तारीफ करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे गांव पूरे प्रदेश और देश के लिए मिसाल हैं, जहां कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने में ग्रामीण खुद ही जागरूक रहते हैं। एफआईआर ना होने का मतलब यही है कि यहां शांति और भाईचारा कितना मजबूत है।

संस्कार और शिक्षा से बढ़ रही है युवाओं की संख्या
कादीपुर में अब युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है, जो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही बुजुर्गों से संस्कार और आपसी सहयोग की सीख भी मिलती है। इसलिए युवा आधुनिकता के साथ-साथ अपनी परंपराओं और गांव की शान को भी बचाए हुए हैं।

जानिए, क्या कहते हैं गांव के लोग?
गांव के लोग मानते हैं कि अगर देश के हर गांव और शहर में लोग आपसी समझ और भाईचारे से काम करें, तो पुलिस-थानों और अदालतों का काम कम हो सकता है। उनका कहना है कि विवादों को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत है, न कि लड़ाई-झगड़े या मुकदमेबाजी।

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