समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जहां-जहां जमीन दिखाई दे रही है, वहां-वहां भाजपा के लोग कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं पर 25 जून को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव के नेतृत्व में गोरखपुर गए चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर लेकर रास्ता रोकने, दुर्व्यवहार करने, वाहनों पर अंडे और पत्थर फेंकने तथा काला झंडा दिखाने का आरोप लगाया।

‘न बुलडोजर से डरें, न अंडों से और न ही काले झंडों से’
सपा प्रमुख ने दावा किया कि सरकार शासन-प्रशासन का दबाव बनाकर, पुलिस को आगे करके व्यापारियों और वहां के निवासियों से जबरदस्ती सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवा रही है, ताकि उन्हें मुआवजा ज्यादा न देना पड़े। बुलडोजर को अन्याय का प्रतीक बताते हुए यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को बधाई दी और आह्वान किया कि वे न बुलडोजर से डरें, न अंडों से और न ही काले झंडों से। उन्होंने विधानमंडल के दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष को गोरखपुर में व्यापारियों की आवाज बनने के लिए बधाई देते हुए कहा,“हम उनसे कहेंगे कि वे वहां (गोरखपुर) के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के खिलाफ लिखकर कार्रवाई की मांग करें।”

‘सबसे पहले अपनी पहली घोषणा याद रखनी चाहिए’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके खिलाफ अगर आज कार्रवाई नहीं होती है तो जब जनता समाजवादियों को मौका देगी तो फिर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। यादव ने यह भी कहा कि व्यापारी भी अगर हिम्मत जुटाएं और यह लिख कर दें कि उन पर सहमति के लिए दबाव बनाया जा रहा है तो समय आने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री की ओर संकेत करते हुए कहा, “सोचिए, वह कब विरासत गलियारा बना रहे हैं, जब उनके पास आखिरी बजट बचा है।” उन्होंने कहा कि अगर उन्हें गोरखपुर (मुख्यमंत्री योगी का गृह जिला) के लिए कुछ काम करना था तो उन्हें सबसे पहले अपनी पहली घोषणा याद रखनी चाहिए।

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