‘आई लव मोहम्मद’ लिखे विवादित पोस्टर और नारों को लेकर उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तनाव का माहौल बना था. इस मामले पर अब समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान ने चुप्पी तोड़ी है. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर दरार पैदा कर दी है, और प्रशासन को जगह-जगह कार्रवाई करनी पड़ी है.

रामपुर में मीडिया से बात करते हुए आजम खान ने पूरे विवाद को बातचीत से हल करने की वकालत की. उन्होंने कहा, “अगर मैं इसे चिंगारी भी कहूं, तो यह छोटी सी बात इतनी बड़ी आग कैसे बन गई? अगर जिला प्रशासन चाहता तो बातचीत से मामला सुलझाया जा सकता था. मामला कितना भी बिगड़ जाए, बातचीत से ही हल निकलता है. जरा जंगों का नतीजा तो देखो… यह भाईचारा खत्म करने की साजिश थी. जाहिर है, अगर कोई किसी से प्यार करता है, तो यह उसका जन्मसिद्ध अधिकार है…”

आजम खान ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद को जिला प्रशासन की निष्क्रियता या जानबूझकर की गई अनदेखी के कारण बढ़ने दिया गया. उनके अनुसार, यह विवाद भाईचारे को खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है. खान ने जोर देकर कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े मसले बातचीत से हल हो जाते हैं, फिर यह छोटा सा मामला क्यों नहीं सुलझाया जा सका. उन्होंने किसी व्यक्ति के प्यार जताने के अधिकार को ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ बताकर अपनी बात समाप्त की. उनका यह बयान विवाद को लेकर सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ सकता है. 

‘आई लव मोहम्मद’ विवाद की कहानी

‘आई लव मोहम्मद’ (I Love Muhammad) विवाद की शुरुआत सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के रावतपुर इलाके से हुई. बारावफात  के जुलूस के दौरान, मुस्लिम युवाओं ने सड़क किनारे एक लाइटिंग बोर्ड पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा पोस्टर/बैनर लगा दिया. 

स्थानीय हिंदू संगठनों और निवासियों ने इसे ‘नई परंपरा’ बताकर इस पर आपत्ति जताई, क्योंकि उनके अनुसार यह स्थान पारंपरिक रूप से हिंदू त्योहारों के लिए इस्तेमाल होता रहा है. विवाद बढ़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और ‘नई परंपरा’ शुरू न करने का हवाला देते हुए पोस्टर हटवा दिया. इसके बाद, दोनों समुदायों के बीच पोस्टर फाड़ने को लेकर तनाव और बढ़ गया, जिससे पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ा. 

कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद जल्द ही यूपी के बरेली, उत्तराखंड, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में फैल गया. तनाव बढ़ने पर कई स्थानों पर प्रदर्शन, गिरफ्तारी और FIR दर्ज की गईं.  बरेली में तो पुलिस को जमकर लाठीचार्ज करना पड़ा.

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