विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं करेगा। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की नाराज़गी पर उन्होंने सवाल उठाया कि “जब चीन सबसे बड़ा रूसी तेल आयातक है तो उस पर टैरिफ क्यों नहीं लगाया गया?” जयशंकर ने अमेरिका से जारी ट्रेड विवाद पर कहा कि भारत की तीन सख्त प्राथमिकताएँ हैं किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों की रक्षा, तेल आयात पर राष्ट्रीय हित और भारत-पाक रिश्तों में किसी भी तरह की बाहरी मध्यस्थता का विरोध। उन्होंने कहा कि अमेरिका से बातचीत जारी है, लेकिन इन मुद्दों पर कोई समझौता संभव नहीं है।
 

अमेरिका के साथ चल रही बातचीत पर विदेश मंत्री ने साफ़ कहा-“नेगोशियेशंस अभी जारी हैं लेकिन हमारी रेड लाइन्स स्पष्ट हैं। सबसे अहम है किसानों और छोटे उत्पादकों के हित। इस पर कोई भी सरकार समझौता नहीं कर सकती। विपक्ष को भी अगर एतराज़ है तो साफ कहें कि वे किसानों की सुरक्षा के पक्ष में नहीं हैं।”
रूस से तेल आयात पर अमेरिका की पाबंदियों को लेकर जयशंकर ने दोहरा रवैया उजागर किया। “अगर तेल का मुद्दा है तो चीन, जो रूस से सबसे ज़्यादा आयात करता है, उस पर टैरिफ क्यों नहीं लगाया गया?” 

“यूरोप और अमेरिका खुद रूस से खरीद करते हैं, तो भारत पर सवाल क्यों?” उन्होंने साफ़ कहा कि ऊर्जा नीति पर फैसले भारत अपने हित में करेगा, किसी के दबाव में नहीं। गौरतलब है कि रूस से तेल आयात जारी रखने पर अमेरिका ने भारत पर  25% अतिरिक्त टैरिफ  लगाया है। वॉशिंगटन का दावा है कि इससे रूस की आमदनी को नुकसान पहुँच रहा है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि तेल आयात जारी रहेगा । 

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