कर्नाटक के मैसूर जिले का छोटा सा गांव सुत्तूर स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में एक अलग पहचान बना रहा है। आमतौर पर जहां गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शाम होते ही बंद हो जाते हैं, वहीं सुत्तूर में यह केंद्र 24 घंटे ट्रॉमा सेंटर की तरह संचालित होता है। करीब 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में हर व्यक्ति का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड अस्पताल में सुरक्षित रखा गया है। यहां हर समय डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी रहती है, जिससे लोगों को तुरंत इलाज मिल पाता है।

मठ और आधुनिक चिकित्सा का संगम
सुत्तूर में स्थित वीरशैव मठ का इस मॉडल में अहम योगदान है। इसी मठ के सहयोग से जेएसएस अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। यहां आध्यात्मिक सेवा भावना के साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का समन्वय देखने को मिलता है।

नियमित जांच और मुफ्त इलाज
गांव में हर छह महीने पर सभी लोगों की हार्ट जांच और डेंटल स्क्रीनिंग की जाती है। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर हर महीने स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों का चेकअप करते हैं। सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी महंगी जांचें भी यहां लगभग निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

घर-घर स्वास्थ्य निगरानी
स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े आशा कार्यकर्ता गांव के हर घर तक पहुंचते हैं और लोगों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करते हैं। किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मरीज को अस्पताल लाया जाता है, जिससे समय रहते इलाज संभव हो पाता है।

युवाओं को भी दी जा रही ट्रेनिंग
गांव के युवाओं को प्राथमिक चिकित्सा और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि आपात स्थिति में वे मदद कर सकें।

बच्चों की भी विशेष देखभाल
सुत्तूर में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी इसी केंद्र पर है। नियमित चेकअप और इलाज की सुविधा के कारण यहां बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह मॉडल दिखाता है कि सही योजना और सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

By admin

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