उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के पंजीकृत राजनीतिक दलों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। आयोग ने 121 दलों को नोटिस जारी कर बुलाया था। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, राजनीतिक दलों को हर साल 31 अक्टूबर तक अपनी वित्तीय रिपोर्ट आयोग के पास हर हाल में जमा करनी होगी। 

121 दलों को भेजा गया था नोटिस 
दरअसल, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने लखनऊ स्थित अपने कार्यालय में 38 पंजीकृत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ सुनवाई की। जिन 121 दलों को बुलाया गया था, उनमें से 70 दल उत्तर प्रदेश के पते पर पंजीकृत थे लेकिन उन्होंने पिछले छह वर्षों में कोई चुनाव नहीं लड़ा था। यह सुनवाई भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर हुई। सीईओ ने दलों द्वारा प्रस्तुत प्रमुख दस्तावेजों की जांच की, जिनमें कांन्ट्रीब्यूशन रिपोर्ट, वार्षिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट और चुनाव व्यय विवरण शामिल थे। उन्होंने उनके पंजीकरण संख्या, मोबाइल नंबर, ईमेल पते और वर्तमान कार्यालय पते की भी जांच की। 

’30 सितंबर तक अपनी योगदान रिपोर्ट दाखिल करें’
नवदीप रिनवा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी राजनीतिक दलों को हर साल 30 सितंबर तक अपनी योगदान रिपोर्ट और 31 अक्टूबर तक अपने लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त, व्यय रिपोर्ट लोकसभा चुनाव के 90 दिनों के भीतर और विधानसभा चुनाव के 75 दिनों के भीतर दाखिल की जानी चाहिए। 20,000 रुपये से अधिक के योगदान की सूचना देनी होगी। गौरतलब है कि मंगलवार को अखिल भारतीय रविदास समता पार्टी (मेरठ), बहुजन सेना (गाजियाबाद) और हिंदुस्तान जन मोर्चा (देवरिया) जैसे दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

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