उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भेड़ियों के हमले से लोग भयभीत हैं। मंझारा तौकली इलाके से बड़ी खबर है कि वहां एक भेड़िये का शव मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि यह भेड़िया मार दिया गया है। वन विभाग के डीएफओ रामसिंह यादव ने भी इसकी पुष्टि की है। यह शव मंझारा तौकली गांव के रोहित पुरवा इलाके में पाया गया। वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मंझारा तौकली इलाके में 9 सितंबर से जंगली भेड़िये सक्रिय हैं। इनके हमलों में अब तक 4 बच्चों की मौत हो चुकी है और 14 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। लोग काफी डरे हुए हैं और वन विभाग भी भेड़ियों को पकड़ने की कोशिश में लगा हुआ है।

क्यों नहीं पकड़ पाए भेड़ियों को?
भेड़िये हमले के बाद तुरंत गायब हो जाते हैं, ना तो कैमरों में दिखते हैं और ना ही कहीं और नजर आते हैं। इस समय किसानों के खेतों में गन्ने की फसलें बड़ी हो गई हैं, साथ ही ग्रामीण इलाकों में पेड़-पौधे भी ज्यादा हैं। भेड़िये इन घने इलाकों का फायदा उठाकर एक खेत से दूसरे खेत में चले जाते हैं, इस वजह से उन्हें पकड़ पाना मुश्किल हो रहा है। वन विभाग ने कहा है कि वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही भेड़ियों को पकड़ लिया जाएगा।

क्यों बच्चे होते हैं निशाना?
भेड़ियों का आतंक पहले भी बहराइच में बहुत बढ़ चुका था, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई थी। कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हुई थी, लेकिन अब फिर से वही समस्या सामने आई है। डीएफओ रामसिंह यादव के अनुसार, बारिश के बाद नदियों के किनारे बनी मांदों में पानी भर जाता है, जिससे भेड़ियों को सुरक्षित ठिकाना और पर्याप्त भोजन नहीं मिलता। मजबूरी में ये भेड़िये लोगों के बसे इलाकों की ओर आने लगते हैं। छोटे बच्चे आसानी से पकड़े जा सकते हैं, इसलिए भेड़िये अक्सर मासूम बच्चों को ही निशाना बनाते हैं। वहीं वन विभाग अब इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और जल्द से जल्द इस खतरे से निपटने की योजना बना रहा है ताकि गांव के लोग सुरक्षित रह सकें।

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