उत्तर प्रदेश में कौशांबी जिले के सैनी कोतवाली क्षेत्र में एक 8 साल की बच्ची से कथित रेप के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस गंभीर घटना के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है, जिससे माहौल और गर्म हो गया है। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है।

सपा नेताओं की एंट्री पर रोक, कई नजरबंद
घटना के बाद समाजवादी पार्टी ने सक्रियता दिखाई और कई बड़े नेता पीड़ित परिवार से मिलने के लिए कौशांबी रवाना हुए। लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोक दिaया। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल को प्रयागराज स्थित पार्टी दफ्तर में ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया। चायल विधायक पूजा पाल को कोखराज इलाके में ही रोक लिया गया। सपा जिलाध्यक्ष दया शंकर यादव को सिराथू में नजरबंद किया गया। इन सभी नेताओं की योजना पीड़िता के परिवार से मिलने की थी, लेकिन पुलिस ने एहतियातन उन्हें गांव में जाने नहीं दिया।

गांव में धारा 144 लागू, भारी फोर्स तैनात
गांव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है, यानी 4 से अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर रोक है। गांव में भारी पुलिस बल तैनात है ताकि माहौल शांत बना रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो।

घटना कब हुई और अब तक क्या हुआ?
28 मई 2025: 8 साल की बच्ची से रेप का आरोप लगने पर सिद्धार्थ तिवारी नामक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया। बाद में जांच में सिद्धार्थ को बेगुनाह पाया गया। 4 जून: सिद्धार्थ के पिता रामबाबू तिवारी ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने एक सुसाइड नोट में बेटे को निर्दोष बताते हुए साजिश का आरोप लगाया।

पलटी केस की दिशा, पीड़िता के परिजन गिरफ्तार
जांच में नए तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने अब आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है। इस आधार पर पीड़िता के पिता और चाचा को जेल भेज दिया गया है। गांव में स्थिति अब भी तनावपूर्ण है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है।

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