समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर से बीजेपी विधायक राजेश कुमार ने एक विवादित बयान देकर राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि जो भी सरकारी दफ्तरों में घूस की मांग करे, उसे जूते से मारकर ठीक किया जाना चाहिए। विधायक का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राजेश कुमार ने यह बयान अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से गरीबों को मुफ्त राशन और आवास योजना का लाभ मिल रहा है, लेकिन कुछ लोग इन योजनाओं का लाभ पाने के लिए गरीबों से दलाली और घूस मांगते हैं, जो पूरी तरह गलत है।” उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में लोगों को घूस न देने की सलाह दी और कहा, “जो भी आपको घूस देने की मांग करे, उसकी शिकायत करें और उसे जूते से मारकर ठीक करें। मुझे फोन करें, मैं भी वहां आकर मदद करूंगा।”

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

बीजेपी विधायक के इस बयान पर विपक्षी पार्टी राजद ने सरकार को घेर लिया है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा कि अब सरकार के अपने विधायक मान रहे हैं कि बिहार में घूसखोरी अपने चरम पर है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय में काम बिना रिश्वत के नहीं होता, और थाने का नाम तो हमेशा बदनाम होता है, लेकिन असलियत यह है कि बिना पैसा दिए काम नहीं होता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के लिए एजेंसियां हैं और विधायक को इस तरह के अपमानजनक बयान नहीं देना चाहिए।

सत्ताधारी विधायक का यह बयान क्यों है विवादास्पद?

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राजेश कुमार का यह बयान राज्य सरकार के खिलाफ एक बड़ा संदेश दे रहा है। बिहार में भ्रष्टाचार और घूसखोरी की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, सरकार और प्रशासन की ओर से इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच घूसखोरी का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में सत्ताधारी दल के विधायक का इस तरह का बयान न केवल सरकार की छवि को धूमिल कर रहा है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या सचमुच बिहार में घूसखोरी पर नियंत्रण पाया जा रहा है?
यह पहला मामला नहीं है जब किसी विधायक या नेता ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो। इससे पहले तिरहुत स्नातक एमएलसी बंशीधर व्रजवासी ने भी कहा था कि घूस मांगने वाले अधिकारियों को जूते से पीट कर ठीक किया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए कहा था कि शिक्षा विभाग में कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं होता।

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