राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृषि एवं कृषि-खाद्य क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को नीति निर्माण, निर्णय-प्रक्रिया और नेतृत्व पदों पर अधिक भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने इस क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में लैंगिक असमानता को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने तीन दिवसीय ‘महिलाएं एवं कृषि-खाद्य प्रणाली’ वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की सफलता की कहानियों को व्यापक रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि समाज उनके योगदान के बारे में अधिक जान पाए। मुर्मू ने भारत द्वारा अपनाए गए महिला-नेतृत्व वाले विकास के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की हर स्तर पर भागीदारी बढ़ाने से समावेशी कृषि वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रपति ने महिला किसानों को भूमि स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान और संस्थागत वित्त तक पहुंच के लिए लक्षित सहायता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

तकनीक की भूमिका पर उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित पहल ‘सरलाबेन’ का उल्लेख किया, जो सरकार के पशुधन देखभाल दृष्टिकोण से प्रेरित है और महिला किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल रही है। सरकार के तमिलनाडु, महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार की महिला किसानों को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का जिक्र करते हुए मुर्मू ने कहा कि अगली पीढ़ी को कृषि क्षेत्र में सार्थक योगदान देने के लिए इन अग्रणी महिलाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2026 को ‘महिला किसान अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किए जाने का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की नेतृत्व भूमिका बढ़ाने और लैंगिक अंतर को कम करने का वैश्विक आह्वान है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में केंद्र सरकार की कई योजनाओं ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 57 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं, जिनमें 56 प्रतिशत महिलाओं के हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार और 90 लाख स्वयं सहायता समूह जोड़े गए हैं। इस मिशन के तहत 4.6 करोड़ से अधिक महिला किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियां अपनाने में सहायता मिली है।

उन्होंने ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ का भी उल्लेख किया जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि सटीक कृषि तकनीकों का उपयोग बढ़ सके। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने छह करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से तीन करोड़ से अधिक महिलाएं पहले ही सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय प्राप्त कर रही हैं।

वहीं 2025-26 के केंद्रीय बजट में हर जिले में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए ‘शी मार्ट’ (स्वयं सहायता उद्यमी बाजार) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है जिससे महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने लोगों, पृथ्वी, समृद्धि, शांति और साझेदारी के वैश्विक ढांचे का उल्लेख करते हुए सभी पक्षों से विचार एवं कार्य दोनों में लैंगिक समानता को विशेष प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

मुर्मू ने कहा, ” यदि कृषि सहित हर क्षेत्र में प्रभावी लैंगिक समावेशन सुनिश्चित किया जाए तो हम न केवल सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करेंगे, बल्कि पृथ्वी को अधिक संवेदनशील और सामंजस्यपूर्ण भी बना सकेंगे।” कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान, एम एल जाट, आर एस परोदा और त्रिलोचन महापात्र सहित कई विशेषज्ञ और अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह तीन दिवसीय सम्मेलन महिलाओं की सफलता की कहानियों को साझा करने, कृषि नीतियों में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने, तथा उद्यमिता, वित्तीय मॉडल और बाजार संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा पर केंद्रित है।

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