कानपुर और लखनऊ के बीच रेल सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिन मुश्किलों भरे हो सकते हैं. रेलवे प्रशासन ने गंगा पुल की डाउन लाइन पर पटरी मरम्मत का काम शुरू करने का फैसला लिया है जिसके कारण 2 अप्रैल से 13 मई तक इस रूट पर बड़ा मेगा ब्लॉक रहेगा. इस दौरान कानपुर-लखनऊ मेमू सहित कुल 17 ट्रेनें पूरी तरह निरस्त रहेंगी और स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस व अयोध्या वंदे भारत जैसी 29 महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं. रेलवे ने उन यात्रियों से अपील की है जिन्होंने पहले से टिकट बुक करा रखा है कि वे या तो अपना रिफंड ले लें या फिर अपनी यात्रा की तारीख आगे बढ़ा लें.

42 दिनों तक चलेगा मरम्मत का काम

रेलवे की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह मेगा ब्लॉक कुल 42 दिनों तक प्रभावी रहेगा जिसमें रोजाना सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शाम 5 बजकर 30 मिनट तक काम किया जाएगा. मंडल रेल प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा ने खुद गंगा पुल का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया है और इंजीनियरों को सुरक्षा के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं. रविवार को अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रेनों के निरस्तीकरण और रूट डायवर्जन की लिस्ट पर अंतिम मुहर लगा दी गई है. मरम्मत के दौरान अप लाइन पर ट्रेनों का संचालन सीमित गति और संख्या के साथ जारी रखा जाएगा ताकि पूरी तरह आवाजाही ठप न हो.

झांसी-लखनऊ मेमू और इंटरसिटी जैसी कई ट्रेनें हुईं कैंसल

ब्लॉक के कारण वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-लखनऊ मेमू और कानपुर सेंट्रल-रायबरेली पैसेंजर सहित कई प्रमुख ट्रेनें पटरी पर नहीं दौड़ेंगी. निरस्त होने वाली ट्रेनों की सूची में झांसी-लखनऊ जंक्शन इंटरसिटी भी शामिल है जिससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. इसके अलावा पुणे-लखनऊ एक्सप्रेस और लोकमान्य तिलक टर्मिनस-लखनऊ सुपरफास्ट जैसी छह ट्रेनें बीच के स्टेशनों पर ही अपनी यात्रा समाप्त कर देंगी. बालामऊ से कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन भी केवल उन्नाव तक ही चलेगी जिससे स्थानीय यात्रियों को दूसरे साधनों का सहारा लेना होगा.

गंगा पुल पर पुराने स्लीपर बदलकर लगाए जाएंगे स्टील बीम

इंजीनियरिंग विभाग की टीमें इस मेगा ब्लॉक के दौरान कानपुर और उन्नाव की सीमा पर स्थित गंगा पुल की डाउन लाइन पर आधुनिक मशीनों की मदद से मरम्मत का काम करेंगी. पुल के पुराने पड़ चुके स्लीपरों को हटाकर उनकी जगह मजबूत स्टील के एच बीम लगाए जाएंगे और पटरियों के साथ-साथ लोहे की चादरें भी बदली जाएंगी. रेल अधिकारियों का कहना है कि पुल की मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह काम बहुत जरूरी है जिसे काफी समय से टाला जा रहा था. इस मरम्मत कार्य के पूरा होने के बाद ट्रेनों की रफ्तार में भी सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है.

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