कानपुर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और ई-रिक्शा संचालन में अव्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने बड़ी पहल की है। एडीसीपी ट्रैफिक राजेश कुमार पाण्डेय ने ई-रिक्शा और ई-ऑटो चालकों के लिए क्यूआर कोड आधारित सत्यापन अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह अभियान 25 फरवरी 2026 से लागू होगा। इसका उद्देश्य ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करना, अपराध पर नियंत्रण पाना और शासन के निर्देशानुसार चालकों का शत-प्रतिशत सत्यापन सुनिश्चित करना है।

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5 दस्तावेज अनिवार्य, तभी मिलेगा स्टीकर
पुलिस द्वारा सभी ई-रिक्शा और ई-ऑटो चालकों को क्यूआर कोड युक्त विशेष कलर स्टीकर निःशुल्क जारी किए जाएंगे। स्टीकर प्राप्त करने के लिए वाहन स्वामी को अपने संबंधित थाने या सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) कार्यालय में बने काउंटर पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे। काउंटर पर मौजूद कर्मी सभी विवरण सॉफ्टवेयर में दर्ज करेंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद कंप्यूटर स्वामित्व और पते के आधार पर संबंधित जोन का क्यूआर कोड युक्त स्टीकर नंबर सहित जारी करेगा। पर्ची लेकर वाहन स्वामी कार्यालय परिसर से स्टीकर प्राप्त कर सकेंगे।

जोन के हिसाब से रंगीन स्टीकर
ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए शहर को सात जोन में विभाजित किया गया है—

रेड जोन (रूट नं. 1) – कोतवाली, फीलखाना, मूलगंज, कलक्टरगंज, हरवंश मोहाल, बादशाही नाका, अनवरगंज, चमनगंज, रायपुरवा, बेकनगंज।

ग्रीन जोन (रूट नं. 2) – नौबस्ता, किदवई नगर, बाबूपुरवा, रेलबाजार, सेन पश्चिम।

रामादेवी चौराहा से नौबस्ता चौराहा तक फ्लाईओवर के नीचे दोनों ओर संचालन की अनुमति।

धानी जोन (रूट नं. 3) – बर्रा, गुजैनी, हनुमंत विहार, जूही, गोविंद नगर।

ब्लू जोन (रूट नं. 4) – चकेरी, जाजमऊ, छावनी।
रामादेवी से नौबस्ता फ्लाईओवर के नीचे दोनों ओर संचालन की अनुमति।

येलो जोन (रूट नं. 5) – कर्नलगंज, ग्वालटोली, सीसामऊ, बजरिया, कोहना।

वायलेट जोन (रूट नं. 6) – कल्याणपुर, पनकी, अरमापुर, रावतपुर।

पिंक जोन (रूट नं. 7) – काकादेव, स्वरूपनगर, नजीराबाद, फजलगंज, नवाबगंज।

यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस
नई व्यवस्था के तहत यात्री क्यूआर कोड स्कैन कर चालक और वाहन की पूरी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। किसी दुर्घटना या आपराधिक घटना की स्थिति में वाहन और चालक की तत्काल पहचान संभव होगी। इससे यात्रियों की सुरक्षा और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

अवैध स्टैंड और वसूली पर सख्ती
एडीसीपी ट्रैफिक राजेश कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि नगर निगम द्वारा ई-रिक्शा के लिए कोई अधिकृत स्टैंड निर्धारित नहीं किया गया है। स्टैंड के नाम पर किसी को पैसा देने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अवैध वसूली करता है या दबाव बनाता है तो तत्काल संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

चोरी पर लगाम ITMS से होगी निगरानी
हर ई-रिक्शा का डाटा पुलिस सर्वर पर दर्ज होगा। यदि कोई वाहन चोरी होता है या रूट बदलता है तो आईटीएमएस कैमरों की मदद से उसे ट्रैक कर तुरंत पकड़ा जा सकेगा।अलग-अलग रंगों के क्यूआर स्टीकर से यातायात पुलिस दूर से ही यह सुनिश्चित कर सकेगी कि ई-रिक्शा अपने निर्धारित रूट पर संचालित हो रहा है या नहीं, जबकि यात्री एक स्कैन में चालक की पहचान, फिटनेस और बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे—जिससे दुर्घटना या अपराध की स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

‘यंग इंडियन’ संस्था का सहयोग
इस अभियान में यंग इंडियन संस्था सहयोग दे रही है। पहले चरण में 10 हजार रंगीन क्यूआर स्टीकर निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। संस्था के चेयरमैन संचित अग्रवाल और सह-चेयरमैन यश अग्रवाल ने बताया कि सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा है। यदि कोई बेटी या महिला ई-रिक्शा में बैठती है तो वह क्यूआर कोड की फोटो खींचकर अपने पिता या अभिभावक को भेज सकती है। इससे परिवार को वाहन और चालक की पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी और वे निश्चिंत होकर यात्रा कर सकेंगे। किसी भी आपात स्थिति में क्यूआर कोड स्कैन कर चालक का नाम, पंजीकरण विवरण, बीमा और फिटनेस संबंधी जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकेगी। इससे घटना होने पर तत्काल पहचान और कार्रवाई संभव होगी। अक्सर यह शिकायतें मिलती रही हैं कि एक ही नंबर प्लेट से दो ई-रिक्शा चलाए जा रहे हैं या कुछ चालक नंबर प्लेट को आंशिक रूप से छुपाकर वाहन संचालित करते हैं। क्यूआर कोड आधारित डिजिटल सत्यापन से इस तरह की अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल शहर में माता-बहनों की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

आमजन और वाहन स्वामियों को लाभ
इस व्यवस्था से शहरवासियों को जाम की समस्या में कमी, सत्यापित चालक और वाहन से सुरक्षा की भावना, आपराधिक घटनाओं में त्वरित पहचान, फिटनेस युक्त वाहन से दुर्घटनाओं में कमी, बार-बार कागज चेकिंग से राहत, अवैध वाहनों पर रोक से वैध चालकों को अधिक सवारी और जाम कम होने से बैटरी की बचत का लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जब कानपुर आए थे तो उन्होंने शहर के जाम के मुद्दे को उठाते हुए पत्रकारों से चर्चा की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट कर ‘जाम के झाम’ को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। ऐसे में पुलिस की यह नई पहल ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

By admin

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