अफजाल अंसारी ने बताया कि भाई की मौत से पहले 26 मार्च को जब मैं अस्पताल में गया था, उस दौरान डॉक्टर थर-थर कांप रहे थे। मैंने कहा फोन नंबर दे दो तो मुझे वो अपना फोन नंबर तक नहीं दिये। उसने कहा कि प्रतिबंधित किया गया है।
अफजाल अंसारी ने कहा कि एम्स का डॉक्टर यदि पोस्टमार्टम करेगा तो मुझे भी संतुष्टी हो जाएगी। लेकिन इस मांग काे न मामने का क्या कारण है। नाखून और बाल की जांच क्यों नहीं की गई। जो जांच विसरा टीम को चाहिए थी वहां वो नमूना भेजा ही नहीं गया।
उन्होंने कहा कि अपने गुनाह पर पर्दा डालने के लिए विसरा जांच से पहले पदासीन अधिकारी को हटाकर अपने आदमी को वहां बैठाया गया। वहीं जब अफजाल अंसारी से पूछा गया कि क्या विसरा जांच पर आपको संदेह है?
दरअसल, बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी की मौत के बार मुख्तार के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि नेता को जेल में धीमा जहर दिया गया था। अब विसरा जांच से पता चला है कि मुख्तार अंसारी को जहर नहीं दिया गया था। लेकिन अब मुख्तार की विसरा जांच में कोई जहर नहीं मिला।