दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग लड़की का कई बार यौन उत्पीड़न करने के आरोपी दुकानदार को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि आरोप गंभीर और संगीन प्रकृति के हैं, पीड़िता के बयान में एकरूपता है और जांच महत्वपूर्ण चरण में है। इसलिए, ‘‘अग्रिम जमानत के लिए वर्तमान अर्जी को खारिज किया जाता है।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अक्टूबर 2023 में पीड़िता और उसके परिवार के पड़ोस में स्थानांतरित हो जाने के बाद, आरोपी ने नाबालिग लड़की का लंबे समय तक और कई बार यौन उत्पीड़न किया।
आरोप है कि उसने पीड़िता के परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसे अपनी दुकान पर आने के लिए मजबूर किया। पिछले साल अक्टूबर में, पीड़िता ने अपनी मां को यौन उत्पीड़न के बारे में बताया, जिसके बाद पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
फैसले में, अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आधार को खारिज कर दिया और कहा कि पीड़िता ने शुरूआत में किसी को भी उन घटनाओं के बारे में नहीं बताया, लेकिन वह ‘‘प्रारंभिक शिकायत में और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराये गए अपने बयान में इन आरोपों पर कायम रही।’’
न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि, ‘‘पीड़िता की आयु, अपराध की प्रकृति, तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना सहित मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, इस न्यायालय को याचिकाकर्ता (आरोपी) के पक्ष में विवेकाधिकार का प्रयोग करने का कोई आधार नहीं मिलता है।