मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. कहीं पेट्रोल और LPG की कमी हो रही है तो कहीं जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इजरायल और अमेरिका के ताबड़तोड़ हमलों के जवाब में ईरान का इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बनाने से युद्ध अब और भी खतरनाक रूप ले लिया है. इस वैश्विक तनाव के बीच अब अमेरिका के अन्दर ही विद्रोह होने शुरू हो गए हैं. शनिवार को अमेरिका में भारी भीड़ ने नो किंग्स प्रदर्शनों में भाग लिया.

इस प्रदर्शन से अमेरिका में सियासी पारा अपने चरम पर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नो किंग्स प्रदर्शन ने व्हाइट हाउस की चिंताएं बढ़ा दी हैं. शनिवार को अमेरिका के 3,000 से ज्यादा शहरों सहित पड़ोसी देशों कनाडा और मैक्सिको में भी लाखों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे. राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के खिलाफ नो किंग्स गठबंधन के बैनर तले पूरे अमेरिका में विरोध की एक ऐसी लहर उठी है, जिसने ट्रंप सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

नो किंग्स रैलियों का आयोजन करने वाले लोगों का कहना है कि ट्रंप का शासन एक लोकतांत्रिक नेता के बजाय किसी ‘राजा’ जैसा होता जा रहा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है.

Hundreds of “No Kings” protesters gathered at San Francisco’s Ocean Beach on March 28, 2026, to form a massive human banner. The aerial message, “TRUMP MUST GO NOW!”, signaled a powerful escalation in nationwide anti-war and… pic.twitter.com/o2REZX0Bj4

— Macro Pulse (@Macropulse01) March 28, 2026

ईरान युद्ध पर फूटा गुस्सा

वॉशिंगटन डी.सी. के लिंकन मेमोरियल पर जुटी भीड़ में शामिल कैथरीन अर्नोल्ड ने राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद ड्राफ्ट डोजर यानी सेना से बचने वाले रहे हैं और हमारे बच्चों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं. वहीं इस प्रदर्शन में शामिल कारिना कागान ने ईरान युद्ध को एक मूर्खतापूर्ण और अहंकारी युद्ध बताया.

इमिग्रेशन पर सवाल

वर्मोंट और मिनेसोटा जैसी जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने इमिग्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा की जा रही कार्रवाई को अमानवीय बताया है. 71 साल से अमेरिका में रह रहे मारियो डेल ओबाल्डिया ने कहा कि यह बहुत ही दुखद है कि लोगों को हर समय अपने साथ दस्तावेज साथ लेकर चलने पड़ते हैं. यह अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ है.

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की स्पोकपर्सन अबीगैल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने इसे ट्रंप डैरेंजमेंट थेरेपी सेशन यानी ट्रंप विरोधी मानसिकता बताते हुए कहा कि इन रैलियों में केवल वही पत्रकार दिलचस्पी ले रहे हैं जिन्हें इसके लिए पैसे मिलते हैं.

अमेरिका में हुए इस प्रदर्शन में युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए. थर्ड एक्ट के संस्थापक बिल मैककिबेन ने कहा कि यह अमेरिकी इतिहास का एक बहुत ही अजीब और कठिन दौर है, जहां लोग वर्तमान शासन को फासीवाद के करीब देख रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि केवल वोट देना काफी नहीं है बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना भी जरूरी है.

तीसरी बार हो रहा प्रदर्शन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में हो रहा यह नो किंग्स प्रदर्शनों की तीसरा हिस्सा है. बीते साल में भी दो बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए थे. इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, ईंधन की कीमतें और अर्थव्यवस्था में धीमापन जैसी समस्याएं भी कारण थीं.

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