यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर किए गए मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ले ली है। यह हमला मौजूदा पश्चिम एशिया युद्ध के शुरू होने के बाद हूतियों की पहली सीधी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने दक्षिणी इजराइल में “संवेदनशील सैन्य ठिकानों” को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इजराइली सेना ने पुष्टि की है कि उसने यमन से दागी गई मिसाइल को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही इंटरसेप्ट कर लिया।

 

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोहियों के इस कदम से युद्ध का दायरा और फैल सकता है और क्षेत्र में नया मोर्चा खुल सकता है।  हूती विद्रोहियों ने इससे पहले संकेत दिया था कि वे इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं। अब इस हमले के साथ उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी भागीदारी दिखा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हूती विद्रोहियों की एंट्री से सबसे बड़ा खतरा लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के व्यापारिक मार्गों पर पड़ सकता है। पहले भी हूती विद्रोही 100 से अधिक जहाजों पर हमले कर चुके हैं । कई पोत डूबे और नाविकों की मौत हुई। अगर फिर से हमले शुरू हुए, तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है

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