पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 47 वर्षों (1979 के बाद) में हुई पहली उच्च-स्तरीय सीधी बातचीत नाकाम रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुष्टि की कि 21 घंटे तक चले मैराथन विचार-विमर्श के बावजूद दोनों पक्ष अपने गहरे मतभेदों को सुलझाने में असफल रहे।

उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया कि अमेरिका ने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी थीं लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने उनकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने दो टूक कहा अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करने या उनके करीब जाने वाली तकनीक विकसित न करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता जताए। वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है जिस पर ईरान सहमत नहीं हुआ।

दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने पुष्टि की कि बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। ईरान के अनुसार चर्चा के मुख्य केंद्र थे,तेल व्यापार का मुख्य समुद्री मार्ग खोलना। ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध के मुआवजे पर चर्चा। ईरान और पड़ोसी क्षेत्रों में शत्रुता को पूरी तरह खत्म करना। बकाई ने कहा कि कूटनीति की सफलता तभी संभव है जब विरोधी पक्ष ‘अत्यधिक मांगों और गैर-वाजिब जिद’ को छोड़कर ईरान के अधिकारों को मान्यता दे।

जेडी वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की जमकर तारीफ की। उन्होंने पाकिस्तान को ‘शानदार मेजबान’ बताते हुए कहा कि वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तान की वजह से नहीं थीं। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच की खाई को पाटने की पूरी कोशिश की।

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