दिल्ली के चुनावी माहौल में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कालकाजी विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) उम्मीदवार मुख्यमंत्री आतिशी ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के हित में पक्षपात का आरोप लगाया।

आतिशी ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि दिल्ली में खुलेआम चुनावी गड़बड़ियों का खेल चल रहा है और पुलिस एवं चुनाव आयोग इन गड़बड़ियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इस मौके पर उनके साथ दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे।

आतिशी ने दावा किया कि 3 फरवरी को पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की बजाय भाजपा के करीबी लोगों को मौके से भगा दिया। उन्होंने बताया कि कुछ लोग, जिनके बारे में उन्हें जानकारी मिली थी कि वे भाजपा के सदस्य हैं, दिल्ली पुलिस द्वारा बिना किसी ठोस कारण के छोड़ दिए गए।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि दो युवकों सागर मेहता और अश्मित सिंह, जो चुनावी गड़बड़ी की रिपोर्ट कर रहे थे, उनको पुलिस ने न सिर्फ थाने में बैठाए रखा, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है, जिसमें पुलिस की बदसलूकी दिख रही है।

आतिशी ने कहा, “ये सारी घटनाएं चुनाव आयोग के सामने हुई हैं, लेकिन आयोग ने इन मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।” उनका कहना था कि जब उन्होंने चुनाव आयोग और पुलिस से शिकायत की, तो दोनों ने किसी कार्रवाई में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसकी बजाय, शिकायत करने वालों को पुलिस द्वारा परेशान किया गया।

आतिशी ने चुनाव आयोग के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आज दिल्ली की जनता देख रही है कि भाजपा द्वारा किए जा रहे गलत कार्यों पर चुनाव आयोग और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं और सड़कों पर खुलेआम पैसे बांट रहे हैं, जिससे चुनाव में गड़बड़ी हो रही है।

मनीष सिसोदिया ने भी चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग पहले पूरी दुनिया में एक उदाहरण था, लेकिन अब यह भाजपा के दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और दिल्ली की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता समझदार है और वह इस बार अपने वोट से सही निर्णय लेगी। उन्होंने चुनाव आयोग से यह सवाल भी किया कि क्या यह सब खुलेआम चुनावी धोखाधड़ी है, जो कानून की धज्जियां उड़ा रही है।

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