उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए अब एक नया दर्शन समय लागू कर दिया गया है। मौसम में बदलाव और ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन तथा आरतियों का समय फिर से निर्धारित किया है ताकि श्रद्धालुओं को ठंड में किसी तरह की असुविधा न हो और वे पूरी शांति से भगवान राम के दर्शन कर सकें।

नई व्यवस्था के तहत मंगला आरती अब सुबह 4:30 बजे से 4:40 बजे तक होगी, जबकि रामलला के दर्शन सुबह 7 बजे से लेकर 11:45 बजे तक जारी रहेंगे। यह बदलाव शीतकालीन सत्र के मद्देनजर किया गया है जिससे भक्तों को पर्याप्त समय मिल सके और मंदिर के अंदर भीड़-भाड़ कम हो।

दर्शन का नया समय और आरती शेड्यूल:
मंगला आरती सुबह 4:30 से 4:40 बजे तक होगी।

सुबह 6:30 बजे श्रंगार आरती शुरू होगी।

रामलला के दर्शन सुबह 7:00 बजे से शुरू होकर 11:45 बजे तक निरंतर जारी रहेंगे।

सुबह 9 बजे रामलला के पट को बालभोग के लिए बंद किया जाएगा, जो 9:05 पर फिर से खुलेगा।

11:45 से 12 बजे तक राजभोग के लिए मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।

दोपहर 12 बजे भोग आरती की जाएगी।

12:15 बजे दर्शन के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी।

12:30 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद हो जाएंगे।

दोपहर 1:30 बजे तक रामलला के दर्शन बंद रहेंगे।

शाम 7:00 बजे संध्या आरती होगी, जिसके बाद दर्शन 8:30 बजे तक जारी रहेंगे।

शाम 7:45 बजे भोग के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

रात 9 बजे से दर्शन के लिए प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा।

रात 9:15 से 9:30 तक भगवान को भोग लगाया जाएगा।

रात 9:30 से 9:45 तक शयन आरती होगी।

रात 9:45 बजे से सुबह 4:30 बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।

बदलाव का कारण:
राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने यह नया समयावली इसलिए जारी की है ताकि ठंड के मौसम में भक्तों को दर्शन के दौरान कम से कम असुविधा हो और वे आराम से पूजा-अर्चना कर सकें। साथ ही इस शेड्यूल के माध्यम से मंदिर में भक्तों की भीड़ नियंत्रित रहेगी और सभी श्रद्धालु उचित व्यवस्था के तहत दर्शन कर सकेंगे।

ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे नए शेड्यूल का पालन करें और मंदिर में निर्धारित नियमों का सम्मान करें ताकि सभी को सुगमता से भगवान राम के दर्शन मिल सकें। इस नए दर्शन समय से न केवल भक्तों को सुविधा मिलेगी, बल्कि मंदिर प्रबंधन भी बेहतर तरीके से संचालन कर पाएगा, जिससे राम मंदिर के पावन स्थल पर आध्यात्मिक माहौल बना रहेगा।

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