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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. इसके बाद उन्होंने कहा कि सीजफायर की स्थिति बहुत कमजोर है और वह लगभग खत्म होने की कगार पर है. ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान अब पहले से काफी कमजोर हो चुका है और उसके प्रस्तावों को उन्होंने बेकार बताया. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने जो शांति प्रस्ताव भेजा था, वह उन्होंने ठीक से पढ़ा भी नहीं, क्योंकि वह उनके अनुसार कोई काम का नहीं था. उन्होंने दावा किया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका एक दिन में ईरान की सैन्य ताकत को खत्म कर सकता है. ट्रंप ने ईरान की नेतृत्व व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि वहां की सरकार कमजोर हो चुकी है.

इसके जवाब में ईरान के विदेश मामलों के डिप्टी मंत्री काज़म गरीबाबादी ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह गंभीर तरीके से बातचीत नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका शांति की बात सिर्फ दिखावे के लिए करता है, असल में वह गंभीर नहीं है. गरीबाबादी ने यह भी कहा कि ईरान ने कभी पड़ोसी देशों पर हमला नहीं किया है और इस पूरे इलाके में अमेरिका के सैन्य अड्डों की मौजूदगी तनाव का कारण है. उन्होंने कहा कि कई बार ईरान पर हमले इन्हीं ठिकानों से किए गए हैं. ईरान की संसद के स्पीकर ने भी कहा कि शांति के लिए जो 14 बिंदुओं का प्रस्ताव दिया गया है, उसे मानना ही एकमात्र रास्ता है, नहीं तो स्थिति और खराब हो सकती है.

गरीबाबादी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या कहा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर गरीबाबादी ने कहा कि अगर शांति स्थापित होती है तो वहां हालात और बेहतर हो जाएंगे और आवाजाही ज्यादा सुरक्षित होगी. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने कई भारतीय जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा शांति वार्ता का समर्थन करता है और अगर पाकिस्तान, भारत या कोई भी देश मध्यस्थता करता है तो उसका स्वागत किया जाएगा. इस बीच अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है और सीजफायर पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा है.

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