उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। आज का दिन समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए ‘महा-रविवार’ साबित होने वाला है। अखिलेश यादव की मौजूदगी में कई दिग्गज नेता अपनी पुरानी पार्टियों को ‘टाटा-बाय-बाय’ कहकर साइकिल पर सवार होने जा रहे हैं। इस फेरबदल से सबसे बड़ा झटका मायावती की बसपा और कांग्रेस को लगने वाला है।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी: बसपा के पूर्व ‘चाणक्य’ अब सपा के साथ
बुंदेलखंड के कद्दावर मुस्लिम नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो रहे हैं।नसीमुद्दीन कभी मायावती के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार थे। 2017 में बसपा से बाहर होने के बाद उन्होंने मायावती पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब सपा में शामिल होकर वे पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करेंगे।

‘फूल बाबू’ का बसपा से मोहभंग
पीलीभीत के दिग्गज नेता अनीस अहमद खां उर्फ ‘फूल बाबू’ आज हाथी से उतरकर साइकिल थाम लेंगे। तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री रहे फूल बाबू बीसलपुर की राजनीति के बेताज बादशाह माने जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे बसपा के टिकट पर पीलीभीत से चुनाव लड़े थे। उनके आने से तराई क्षेत्र में सपा बेहद मजबूत हो जाएगी।

अपना दल (S) और कांग्रेस को भी लगा झटका
अपना दल (अनुप्रिया पटेल गुट) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक राजकुमार पाल भी आज लाल टोपी पहनने वाले हैं। राजकुमार पाल अति पिछड़ा वर्ग (OBC) का बड़ा चेहरा हैं। उनके जाने से अनुप्रिया पटेल के खेमे में खलबली मचना तय है।

क्यों अहम है यह दलबदल?
      नेता                                  पुरानी पार्टी                        प्रभाव क्षेत्र                          ताकत
नसीमुद्दीन सिद्दीकी                 कांग्रेस / पूर्व बसपा              बुंदेलखंड / प्रदेश स्तर           बड़ा मुस्लिम चेहरा
अनीस अहमद (फूल बाबू)               बसपा                         पीलीभीत / तराई              जमीनी पकड़, 3 बार विधायक
राजकुमार पाल                          अपना दल (S)                प्रतापगढ़ / अति पिछड़ा           OBC वोट बैंक

अखिलेश की रणनीति: PDA को और मजबूती
अखिलेश यादव लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। राजकुमार पाल के जरिए ‘पिछड़ा’, नसीमुद्दीन और फूल बाबू के जरिए ‘अल्पसंख्यक’ वोटर्स को साधने की यह कोशिश विपक्षी दलों के लिए खतरे की घंटी है। आज दोपहर सपा मुख्यालय में इन सभी नेताओं को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी।

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