मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रविवार को कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र का सबसे बड़ा ‘उपभोक्ता बाजार’ उत्तर प्रदेश है। चिकित्सा प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य देखभाल तंत्र में निवेश, नवाचार और वैश्विक सहयोग के लिए यहां आयोजित तीन दिवसीय ‘यूपी हेल्थ टेक कॉन्क्लेव’ की शुरुआत करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमारे लिए यह सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण है कि इस क्षेत्र का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार उत्तर प्रदेश है।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ है और उसके साथ ही अगल-बगल के राज्य तथा पड़ोसी देश नेपाल की भी स्वास्थ्य सुविधाओं का भार इस प्रदेश पर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने 2014 में देश में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने और 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों का दावा करते हुए कहा कि इस राज्य ने भारत सरकार के साथ मिलकर पिछले आठ-नौ वर्षों के अंदर स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में परिवर्तन करने में व्यापक सफलता प्राप्त की है। स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को बेहतर करने का प्रयास किया है।

आदित्‍यनाथ ने कहा, ‘‘2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे और आज उत्तर प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं, दो एम्‍स हैं, जिला स्‍तर के 100 से अधिक अस्पताल हैं, जो सरकार द्वारा संचालित होते हैं।” उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र (पीएचसी), सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र (सीएचसी) और ‘वेलनेस सेंटर’ की लंबी श्रृंखला है जो दूर दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराती है।

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में व्यापक परिवर्तन और सुविधा मजबूत होने के साथ ही अकेले उत्तर प्रदेश में साढ़े पांच करोड़ प्रधानमंत्री आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए गए और उनके लाभार्थियों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस परिवर्तन के कारण ही मृत्यु दर को नियंत्रित करने और संस्थागत प्रसव को राष्ट्रीय मानक के अनुरूप लाने में सफलता प्राप्त की गयी है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, सम्मेलन को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश को चिकित्सा प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य देखभाल नवाचार और फार्मा विनिर्माण का राष्ट्रीय तथा वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, “एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार), डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी।

आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार ने इंसेफेलाइटिस के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया और मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से शून्य मौत दर्ज की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अगला लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ विज़न को साकार करना है। इसके लिए प्रौद्योगकी का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। आदित्यनाथ ने देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग जगत को उत्तर प्रदेश आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि प्रदेश में बेहतर अवसंरचना, सुरक्षित वातावरण और एकल खिड़की प्रणाली उपलब्ध है।

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