मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजेंद्र भारती, मुकेश मल्होत्रा और निर्मला सप्रे से जुड़े घटनाक्रमों ने इस सीट पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कांग्रेस की इस सीट पर खेला होने की संभावना बढ़ गई है। विधायकों की संख्या घटने और संभावित क्रॉस वोटिंग के चलते चुनाव दिलचस्प हो सकता है, जबकि बीजेपी की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

इससे पहले कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट से राहत तो मिल गई थी, उनकी विधायकी जाते जाते बची, लेकिन शर्त के अनुसार वे राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे। इसके अलावा बीना से विधायक निर्मला सप्रे के रुख को लेकर भी सियासी अटकलें तेज हैं। वे लगातार बीजेपी के मंचों पर नजर आ रही हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि वह कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट नहीं कर सकती हैं। हालांकि हाल ही हाई कोर्ट के पूछने पर निर्मला सप्रे की ओर से दावा किया गया कि वे अभी भी कांग्रेस पार्टी में हैं।

इधर दतिया विधायक राजेंद्र भारती को भ्रष्टाचार मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी पर संकट गहरा गया है। यदि उनकी सदस्यता समाप्त होती है, तो विधानसभा की संख्या समीकरण बदल सकता है। इसी तरह अन्य विधायकों से जुड़े राजनीतिक समीकरण भी सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि राजेंद्र भारती 15 दिन बाद हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं और उन्हें राहत भी मिल सकती है।

राज्यसभा चुनाव में हर विधायक का वोट बेहद अहम होता है। ऐसे में यदि संख्या में थोड़ी भी कमी या बदलाव होता है, तो तीसरी सीट पर जीत-हार का गणित बदल सकता है। यही कारण है कि इन तीनों विधायकों से जुड़े हालात को राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए “निर्णायक फैक्टर” माना जा रहा है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालतों और राजनीतिक फैसलों के बाद अंतिम संख्या क्या बनती है, क्योंकि उसी के आधार पर तय होगा कि राज्यसभा की तीसरी सीट किसके खाते में जाएगी या मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प होगा।

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