इस साल करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।

करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह से बिना कुछ खाए पीये व्रत रखती हैं और शाम को करवा चौथ की पूजा और कथा सुनने के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं।

करवा चौथ का व्रत प्रमुख रूप से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब , हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि काशी पंचाग के अनुसार इस सात कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 09 अक्तूबर को रात्रि 02.49 से हो रही है। चतुर्थी तिथि अगले दिन 10 अक्तूबर को रात्रि 12.24 तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 10 अक्तूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस बार करवा चौथ पर शुभ संयोग बन रहा है।

इस करवा चौथ पर सिद्धि योग बन रहा है, जो पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर में रहेगा, यह शुभ संयोग सुहागिनों के लिए शुभ फलदायी होगा। जिन नवविवाहितों स्त्रियों का पहला करवाचौथ है, वह इस बार व्रत प्रारंभ कर सकेंगी। इस बार गुरु और शु्क्र अस्त नहीं है।

करवा चौथ के दिन नवविवाहित महिलाएं शादी का जोड़ा पहन कर 16 श्रंगार करें और प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा करें। व्रत में शिव पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा का पूजन करने का विधान है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की मनोकामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सुहागिन महिलाएं चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्ध्य देकर पति के हाथों के जल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं और सास का आर्शीवाद लेती है।

इस दिन शाम 5 बजकर 43 मिनट से 6.57 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। 

इस बार करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा। वहीं, दिल्ली और एनसीआर में भी चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 14 मिनट रहेगा।

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