मुजफ्फरनगर। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा अयोध्या में मयार्दा पुरुषोत्तम श्रीराम के रामोत्सव पर वेद मंत्रों से यज्ञ में समृद्ध राष्ट्र निर्माण हेतु आहुतियां दी गई। भजनों के माध्यम से राम महिमा का गुणगान किया गया। शहर आर्य समाज मंदिर में आयोजित समारोह में मुख्य वक्ता एसडी कालेज में संस्कृत प्रोफेसर डॉ. अरुणिमा आर्या ने कहा कि श्रीराम एक आदर्श पुत्र, भाई, राजा एवं पति थे। उनके जीवन में कृतज्ञता का गुण सर्वोपरि था। महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है कि श्रीराम के प्रति यदि किसी ने एक उपकार भी किया हो तो वे उसे कभी भूलते नहीं थे। राज्याभिषेक से पहले राजा दशरथ द्वारा वनवास की आज्ञा से श्रीराम के व्यवहार में थोड़ा सा भी परिवर्तन नहीं आया। वास्तव में श्रीराम शरीरधारी धर्म ही थे। यदि धर्म को समझना है तो श्रीराम के जीवन को सूक्ष्मता से समझना चाहिए। उन्होंने राम-भरत के प्रसंग की महत्ता बताई। मुख्य अतिथि किशोर न्यायालय के न्यायाधीश विकास वर्मा ने कहा कि रामायण वैदिक सिद्धांतों, आदर्शो और मूल्यों की कथा है। श्री राम ने वैदिक परम्पराओं से जीवन निर्वहन किया। उनका त्याग, तपस्या और मयार्दा राष्ट्र के लिये वंदनीय है। भजनोपदेशक हरिश्चंद आर्य, सुकीर्ति आर्या और सुभाष राही ने श्रीराम के प्रेरक भजन सुनाये। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से मुकेश आर्य, अनूप सिंह राठी और हरिओम त्यागी ने आर्य समाज गांधी कालोनी प्रधान राकेश ढिंगरा, गजेंद्र सिंह राणा, आर्य वीर दल जिला संचालक गौरव आर्य को महर्षि दयानंद का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रवीण मलिक, डॉ. जीत सिंह तोमर, अशोक राठी, प्रधानाचार्य अविनाश त्यागी, राज कुमार आर्य, संगीता राठी, मंजू त्यागी, जिला वीरांगना दल संचालिका रचना आर्या आदि मौजूद रही। अध्यक्षता शांता प्रकाश आर्य एवं संचालन अधिवक्ता अनूप सिंह राठी ने किया।

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